सिर्फ पीएम राहत कोष से ही नहीं बल्कि 11 बड़ी सरकारी कंपनियों से भी राजीव गाँधी फाउंडेशन को मिला था दान

राजीव गाँधी फाउंडेशन अचानक से पिछेल 2 दिनों से चर्चा में आ गया है. गाँधी परिवार के स्वामित्व वाले इस फाउंडेशन के बारे में पिछले दो दिनों में कई ऐसी जानकारियाँ सामने आई है जो आपके होश उड़ाने के लिए काफी है. गांधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से लेकर प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष तक से पैसे दान के रूप में मिलने की बात सामने आई है. साथ ही ये बात भी सामने आई है कि देश की कई सरकारी कंपनियों ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान दिया.

ये सब तब हुआ जब देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA की सरकार थी और उसका रिमोट कंट्रोल UPA की चेयरपर्सन रही सोनिया गाँधी के हाथों में था. इस दौरान गृह मंत्रालय समेत 8 मंत्रालयों ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को डोनेशन दिया. इसके अलावा 11 बड़े सरकारी कंपनियों ने भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में दिल खोल कर दान दिया. इसी दौरान इस फाउंडेशन को चीन से दान मिला और प्रधानमंत्री आपदा राहत के पैसों को भी राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान के रूप में ट्रांसफर किया गया.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जिन 11 सरकारी उपक्रमों ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान किया उनके नाम है- LIC, SAIL, GAIL, आयल इंडिया लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, ONGC, IDBI बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स, भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड, आवास और शहरी विकास निगम लिमिटेड. इन सभी कंपनियों ने 2004 से 2013 के बीच राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान दिया.

प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष से तो गांधी परिवार के इस निजी संस्था को एक बार नहीं बल्कि कई बार दान मिला. प्रधानमंत्री राहत कोष के बारे में आपको एक बात जरूर जाननी चाहिए कि जब इस राहत कोष का गठन पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था तो ये तय किया गया कि इसकी संचालन समिति में कांग्रेस का अध्यक्ष परमानेंट शामिल होगा. यानी कांग्रेस का अध्यक्ष जो भी बनेगा वो खुद ही प्रधानमंत्री आपदा रहत कोष की संचालन समिति में शामिल हो जाएगा. जिस दौरान देश में यूपीए की सरकार थी उस दौरान यूपीए की चेयरपर्सन के अलावा कांग्रेस की अध्यक्ष भी सोनिया गाँधी थी और इस नाते वो प्रधानमंत्री आपदा रहत कोष की सञ्चालन समिति में भी शामिल थी.

साल 1985 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने इस फंड का पूर्ण नियंत्रण प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हाथ में दे दिया. उसके बाद से इस फण्ड का कितना पैसा, किस आपदा पर खर्च होगा, यह सिर्फ प्रधानमंत्री की सिफारिश पर तय होने लगा. 2004 से 2014 तक देश के पीएम तो मनमोहन सिंह थे लेकिन सिर्फ रबड़ स्टाम्प पीएम. सुपर पीएम तो सोनिया गाँधी ही थी और इसी दौरान पीएम राहत कोष का पैसा गांधी परिवार के स्वामित्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान के रूप में ट्रांसफर किया गया. प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष वो कोष है जिसमे देश की जनता अपनी मेहनत की कमाई इसलिए दान दी थी, ताकि जरूरत के वक्त जनता की मदद की जा सके. लेकिन गाँधी परिवार ने इसका इस्तेमाल अपने व्यग्तिगत संस्था को धन मुहैया कराने के लिए किया.



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