भारत के साथ चीन की दुश्मनी पड़ी भारी, दुनिया में घटती जा रही है चीनी सामानों की मांग: आइए पढ़े विस्तार से:

भारत और चीन के बीच हुए आपसे हिंसक झड़प के बाद भारत में चीनी सामानों का बिक्री दर काफी कम हो गया है।आपको बता दे की कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में अभी भी कारोबारी गतिविधियां रफ्तार नहीं पकड़ पाई हैं। परन्तु जिस प्रकार से चीन अपनी सभी सीमाओं से सटे देशों के साथ लगातार तनाव बढ़ा रहा है उसको देख के दुनिया में उसके विस्तारवादी नीतियों को भाप लिया गया है । दुनियाभर में चीन में बने सामान की मांग लगातार घट रही है। ऐसे में चीन में मैन्‍युफैक्‍चरिंग गतिविधियों (Manufacturing Activities) की रफ्तार जून में धीमी हो गई है. हालांकि, इस दौरान फैक्‍ट्री गतिविधियों में मामूली इजाफा नजर आ सकता है. वहीं, चीन की राजधानी बीजिंग (Beijing) में कोविड-19 के नए मामले सामने आने और दुनियाभर में संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण धीरे-धीरे डॉमेस्टिक रिकवरी (Domestic Recovery) सुस्‍त होने का खतरा बना हुआ है।
चीन की राजधानी बीजिंग में जून की शुरुआत में एक फूड मार्केट में 200 से ज्‍यादा कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए. इससे फिर लोगों में कोविड-19 को लेकर खौफ पैदा हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि तमाम अर्थव्‍यवस्‍थाओं के लिए किसी वायरस के कारण ये अब तक का सबसे बड़ा खतरा है. मॉर्गन स्‍टेनली (Morgan Stanley) ने कहा, 'हमें सप्‍ताह ये फिर याद आया कि कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्‍म नहीं हुई है. दुनियाभर में नए केस सामने आने का सिलसिला पहले के मुकाबले और तेज हो गया है। वैश्विक महामारी के कारण चीन समेत दुनियाभर में फैक्ट्रियों में क्षमता से काफी नीचे कामकाज हो रहा है।
चीन के निर्यात में मई में 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन महामारी से संबंधित चिकित्सा आपूर्ति की मांग के कारण स्थिति कुछ संभल गई।हालांकि, कैपिटल इकोनॉमिक्‍स ने कहा है कि वर्क फ्रॉम होम की व्‍यवस्‍था घटाने, मास्‍क और दूसरे सुरक्षा उपकरणों के स्‍टॉक्‍स इकट्ठा करने में सुस्‍ती के कारण कामकाज में आया सुधार ज्‍यादा समय तक बना रहने की उम्‍मीद कम ही है।

Advertisement