नहीं है कोई मेडिकल डिग्री हर तीन में से दो डॉक्टर झोलाछाप, देश के ग्रामीण इलाकों की चिकित्सा गुणवत्ता में कैसे हो सुधार

चिकित्सा क्षेत्रों में ग्रामीण भारत अभी भी पिछड़ा हुआ है. हर तीन में से 2 चिकित्सा सेवकों के पास न तो किसी प्रकार की चिकित्सा डिग्री है और न ही कोई औपचारिक चिकित्सीय प्रशिक्षण.ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थय केंद्रों और प्रशिक्षित व अनुभवी चिकित्सकों की कमी है या तो वे बहुत दूर दूर हैं,


सामाजिक विज्ञान और चिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार 75 प्रतिशत गाँवो में कम से कम  एक स्थानीय चिकित्सक है और प्रत्येक गांव में औसतन 3 प्राथमिक चिकित्सक हैं जिनमे से 86 प्रतिशत निजी चिकित्सक हैं और 38 प्रतिशत के पास किसी प्रकार की चिकित्सा डिग्री नहीं है और न ही इन्हे कोई औपचारिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्राप्त है" यह शोध 2016 में WHO द्वारा जारी रिपोर्ट "भारत में स्वास्थ्य कार्यबल" के लगभग लगभग सामानांतर है. शोध के मुख्य लेखक जिस्नु  दास  के अनुसार "मैंने जिन राज्यों में काम किया वहां ये सच है लेकिन मुझे इसका अहसास नहीं था की केरल के आलावा अन्य राज्यों में भी ऐसे हालत हैं ग्रामीणों के विशाल जनसँख्या में अनौपचारिक प्रदाताओं जिन्हे आमतौर पर नीम हकीम कहा जाता है स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के लिए वे ही एकमात्र विकल्प हैं."

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