मुंडन संस्कार के लिए लोगों ने भुला दिया करोना जैसे दुश्मन का नाम, उड़ा दी लॉक डाउन की धज्जियां

या घटना कहां है बलिया में हुकुमछपरा काली मन्दिर गंगा घाट का है, जहां पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था। लोग वहां पर अपने बच्चों का मुंडन संस्कार करने आए थे और यह भूल गए कि हम इस कॉल कोरोना जैसे महामारी से लड़ रहे हैं उन्हें ना खुद की फिकर थी ना ही अपने परिवार जनों की उन्हें ना तो कोरोना का कोई खौफ था और न ही नदी या नाव हादसों की कोई फिक्र।
इसके पहले मैंने मैनेजर के अनुसार यहां पर कोई भी कार्यक्रम करना बंद था और जैसे इन लोगों को थोड़ी सी छूट मिली उन्हें ने वहां पर आकर लोग खुद का सुरक्षा चक्र ही तोड़ बैठे। डब्लूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) से लगायत दिल्ली एम्स के विभागाध्यक्षों की जुलाई माह में कोरोना के पिक आवर में होने की चेतावनी का भी लोगों पर असर नहीं दिखा।
मुण्डन संस्कार की रस्म अदायगी के वक्त लोग पुराने हादसों को भूल मौत का सफर करते भी देखे गये। इस दौरान तेजी की आपाधापी ऐसी मची की एक-एक नाव पर करीब दर्जनभर ओहार होते देखे गये। नदी उस पार पूजन को जा रही किसी भी नाव में पैर रखने की जगह नहीं थी। जीवन से लापरवाही का आलम यही नहीं थमा, लौटते वक्त बीच नदी में ही ओवरलोड नावों पर झिझरी (नदी में नाव को गोल-गोल घुमाना) भी खेली गयी। इसके बाद खुद को तैराक साबित करने वाले युवा बीच नदी में ही छलांग लगाते नजर आए। कहीं से भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि लोगों ने जिले के ही ओझवलिया, ठेकहा, सिकंदरपुर, बड़का खेत आदि हादसों से कोई सबक लिया हो।

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