एशिया के बाद अब अमेरिका को चुनौती दे रहा है चीन,,, आखिर क्यों बनना चाहता है यह दुनिया में खलनायक:

भारत और चीन के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद जीना सिर्फ भारत के लिए झगड़े का मूल रख रहा था बल्कि जापान में चीन की नौसेना तथा पनडुब्बी जापान में घुसपैठ कर रही थी। उसी बीच चीन का फाइटर प्लेन ताइवान के अंदर लगातार अपने घर जनों के साथ ताइवान वालों को डरा रहा था।आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि एक चीन पूरी दुनिया के नाक में दम कर रखा है। कोरोना वायरस का जन्मदाता चीन पूरी दुनिया से कोरोना मामले पर से नजर हटाने के लिए अपने पड़ोसी देशों के साथ घुसपैठ कर रहा है।

फर्स्ट पोस्ट ने न्यूर्याक टाइम्स के हवाले से दी रिपोर्ट में कहा है कि चीन की हरकतों का नतीजा 15 जून की घटना है। यह 1967 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे खूनी झड़प है। चीनी विश्लेषकों, भारतीय मीडिया और अमरीकी इंटेलिजैंस की रिपोर्ट इसमें कुछ चीनी सैनिक भी मारे गए, जिनकी संख्या नहीं बताई गई।

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर साउथ चाइना सी स्टडीज के अध्यक्ष वू शीकुन ने इस सप्ताह बीजिंग में एक कान्फ्रेंस में कहा कि क्षेत्र में अमरीकी सेना की गतिविधियां हैं और किसी युद्ध के खतरे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आस्ट्रेलिया के एक शोध संस्थान चाइना पोलिसी सेंटर के डायरेक्टर एडम नी के अनुसार चीन अन्य क्षेत्रीय ताकतों की तुलना में अपनी शक्ति ज्यादा तेजी से बढ़ा रहा है। इसी वजह से वह इतना अधिक आक्रामक रवैया अपना रहा है। सेना आधुनिक संसाधन और साइबर हथियारों का इस्तेमाल भी हवा और समुद्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि इस साल सैन्य बजट 6.6 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। यह 180 अरब डॉलर तक हो सकता है। यह अमरीका के कुल रक्षा बजट का एक चौथाई है।

दक्षिणी चीन सागर में भी चीन अपना दावा बढ़ाचढ़ा करने लगा है। 2018 के बाद पहली बार पिछले सप्ताह चीनकी पनडुब्बी को पूर्वी चीन सागर में भी गश्त करते पाया गया। तब जापानी युद्धपोत ने उस परमाणु पनडुब्बी को सतह पर आने को विवश किया।

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