चीन की हरकतों को जवाब देने के लिए अमेरिका और यूरोप साथ साथ, चीनी को भुगतना पड़ेगा अपनी गलती का सजा:

भारत और चीन के हिंसक झड़प के बाद अमेरिका और यूरोप में चीन के साथ मिलकर प्राप्त करने की ठान ली है। दोनों देशों ने भारत में जवान हुए 20 शहीदों को श्रद्धा पूर्वक श्रद्धांजलि दी और चीन के इस गलती की सजा देने के लिए उन्होंने एक साथ आने का भी संकल्प लिया।बॉरेल ने यूरोपीय यूनियन के 27 विदेश मंत्रियों और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो के साथ 15 जून को हुई बैठक में भी दोनों से एक साझा अभियान शुरू करने का आह्वान किया था।
पोंपियो ने कहा, यह अच्छा संकेत है कि पश्चिमी देशों पर चीन की बुरी नजर के खिलाफ हम साथ आ रहे हैं। हमारा उद्देश्य एक ऐसा तंत्र विकसित करना है जिससे चीन के नापाक मंसूबों को नाकाम किया जा सके और उसके खतरे से अमेरिका और यूरोपीय देशों को बचाया जा सके। इस दौरान पोंपियो ने बार बार चीन से होने वाले खतरों को रेखांकित किया।
पोंपियो ने इस दौरान भारत चीन सीमा के पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के दुस्साहस का भी जिक्र किया। यहां एक हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए। पोंपियो ने कहा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियां से अमेरिका समेत कई देशों के नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने कहा, दशकों में ट्रंप प्रशासन पहला है जिसने इस खतरे को गंभीरता से लिया है।

Advertisement