गालवान घाटी को अपना चीन ने कहा यह हमेशा ही हमारे हिस्से में था:

भारत और चीन के बीच भारत में अपने एक अधिकारी के साथ 20 जवानों की कुर्बानी दे दी तथा चीन ने इसका खामियाजा अपने 45 जवानों की कुर्बानी देने के साथ किया दोनों देशों के बीच हुई बैठक में देशों ने युद्ध को परिणाम ना मानकर आशीष साला से बातों को सुलझाने पर चर्चा किया। भले ही चीन इस मसले का हल युद्ध को नहीं बता रहा है फिर भी उसका दावा है कि गलवान घाटी हमेशा उसी की निगरानी में रही है और उस पर हमेशा से चीन सरकार का अधिकार है।चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि अगर चीन पूर्व में बने हुए सहमति पर कदम से कदम मिलाकर चलते तो दिन देखने नहीं पड़ते।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने सोमवार रात को हुई झड़प में चीनी पक्ष के 43 जवानों के हताहत होने संबंधी रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से संवाददाता सम्मेलन में इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सीमा पर बल प्रासंगिक मामलों से निपट रहे हैं। प्रवक्ता से सवाल किया गया कि भारत ने हताहतों की संख्या जारी कर दी है, लेकिन चीन अपने हताहत जवानों की संख्या क्यों नहीं बता रहा है, इसके जवाब में झाओ ने कहा कि मैंने कहा कि चीनी और भारतीय सीमा बल प्रासंगिक मामले से मिलकर जमीनी स्तर पर निपट रहे हैं। फिलहाल मुझे इस बारे में और कुछ नहीं कहना है।
पूर्वी लद्दाख के पैंगॉन्ग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी इलाके में भारतीय और चीनी सेना के बीच गतिरोध चल रहा है। पैंगॉन्ग सो सहित कई इलाके में चीनी सैन्यकर्मियों ने सीमा का अतिक्रमण किया है। भारतीय सेना ने चीनी सेना की इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और क्षेत्र में अमन-चैन के लिए तुरंत उससे पीछे हटने की मांग की है। गतिरोध दूर करने के लिए पिछले कुछ दिनों में दोनों तरफ से कई बार बातचीत भी हुई है।

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