चीन के चंगुल में फंसता जा रहा है श्रीलंका, पहले चीन के विरोध में कर रहा था भारत के बात:

भारत और चीन के आपसी विवादों के बाद भारत में यह जाना है कि उसके साथ कौन-कौन से देश खड़े हैं आपको बता दें कि चीन ने नेपाल को नई चाल बुद्धि पढ़ाकर उसे भारत के विरोध में खड़ा कर दिया उसके साथ साथ बांग्लादेश पाकिस्तान तो पहले से ही भारत का विरोध करता रहा है। पर श्रीलंका और चीन के चंगुल में फंसता जा रहा है। श्रीलंका की राजपक्षे सरकार अंतरराष्ट्रीय क़र्ज़दाताओं से से क़र्ज़ लेने की कोशिश कर रही है लेकिन उसे चीन से ही ज़्यादा उम्मीद दिख रही है।

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार 96 करोड़ डॉलर के भारतीय क़र्ज़ की अदायगी को लेकर और मोहलत देने पर श्रीलंका और भारत में बात हो रही है. इसके अलावा श्रीलंका ने भारत से मुद्रा की अदला-बदली की सुविधा की भी मांग की है. भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि श्रीलंका को वर्चुअल बैठक के लिए कहा गया है लेकिन अभी तारीख़ तय नहीं हो पाई है. श्रीलंका ने वर्चुअल बैठक को लेकर अभी कुछ भी नहीं कहा है।

पिछले हफ़्ते श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने यूरोपीय यूनियन के राजदूतों के एक समूह से कहा था कि श्रीलंका को नए निवेश की ज़रूरत है न कि नए क़र्ज़ की. इसके साथ ही उन्होंने क़र्ज़ चुकाने में और मोहलत देने की मांग की थी. कोरोना वायरस की महामारी के वक़्त से ही श्रीलंका क़र्ज़ को चुकाने में आ रही समस्या से जूझ रहा है.

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और चीन के राष्ट्पति शी जिनपिंग

श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही ख़ाली पड़ा है. श्रीलंका एक साथ कई मोर्चों पर आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. द हिन्दू ने लिखा है कि पिछले साल ईस्टर पर आतंकवादी हमला और इसके बाद कोरोना वायरस की महामारी ने श्रीलंका के कारोबार की कमर तोड़ दी है. श्रीलंका मुख्य रूप से चाय, कपड़ा, विदेशों में काम रहे श्रीलंकाई श्रमिकों और पयर्टन सेक्टर से विदेशी मुद्रा हासिल करता है लेकिन ये सारे सेक्टर कोरोना के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

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