चीन का अपना पैंतरा ही पड़ गया उस पर भारी, चीन का "कर्ज नीति " बन गया उसका बड़ा भूल::

चीन एक ऐसा राष्ट्र है जो अपने पड़ोसी छोटे-छोटे रास्तों को कर्ज देकर उन पर अपना वर्चस्व स्थापित करता रहता है। यह कर्ज नीति हैं चीन के लिए एक हथियार का काम करता है जिससे वह कर्ज दिए गए देशों पर अपनी हुकूमत का पहला दाऊ खेलता है। कर्ज दिए गए राष्ट्र अगर उसका कजिन नहीं लौटा पाते हैं तो उन देशों पर वह अपना कब्जा बनाता है। लेकिन आपको बता दें कि चीन अब अपने चाल से  खुद पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा।चीन ने दुनिया के 150 से ज्यादा देशों को कर्ज दिया है. इसमें पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव भी शामिल हैं। लेकिन अब उसे अपना पैसा वापस नहीं मिल रहा है और न ही संपत्ति कब्जाने के उसके मंसूबे सफल हो रहे हैं. पाकिस्तान लगातार कर्ज अदायगी में टालमटोल कर रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान चाहता है कि कर्ज अदायगी के लिए 10 साल का समय और दिया जाए
 बीजिंग भले ही इसके पक्ष में न हो, लेकिन उसे पाकिस्तान की यह बात माननी होगी, क्योंकि इस्लामाबाद से उसके कई रणनीतिक हित जुड़े हैं और आर्थिक नुकसान के लिए वह इनकी बलि नहीं दे सकता।
अमेरिका, जर्मनी की कई शोध संस्थाओं ने चीन की इस कर्जनीति को लेकर बड़ा खुलासा किया है. जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2000 से लेकर 2018 के बीच देशों पर चीन का कर्ज 500 अरब डॉलर से बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर हो गई. आज के हिसाब से 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 375 लाख करोड़ रुपए। वहीं, अमेरिका की हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट कहती है कि चीन और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपए का कर्ज भी दिया है। इस समय चीन दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज देने वाला देश है. इतना कर्ज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक ने भी नहीं दिया है. दोनों ने 200 अरब डॉलर यानी 15 लाख करोड़ रुपए का कर्ज दिया है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो दुनियाभर की जीडीपी का 6 प्रतिशत के बराबर कर्ज चीन ने दूसरे देशों को दिया है।

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