भारत से झड़प के बाद आर्थिक कितना नुकसान झेल चुका है चीन, आइए समझते है::

भारत और चीन के बीच झड़प के बाद कोरोना के जन्मदाता चीन एक बार फिर पूरी दुनिया के आंखों में चुभने लगा है। जिस प्रकार पूरी दुनिया पहले खींची हमसे उसके उत्पादन में बीमारी को रोना के चलते परेशान थी ठीक उसी प्रकार उसके पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद के कारण तेवर दर्द उभर आया है।
चीनी अपनी हरकतों से बाज नहीं आकर युद्ध की विभीषिका के लिए भी जमीन तैयार कर लिया जबकि कोरोनावायरस महामारी में चीनी अर्थव्यवस्था को बड़ा आघात पहुंचा, जिससे मौजूदा वर्ष में चीनी अर्थव्यवस्था के आर्थिक विकास दर का अनुमान 5.6 फीसदी रखा गया है।
कंसल्टेंसी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के के ब्युरा के अनुसार 2020 की पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था में पिछले साल के मुक़ाबले चार प्रतिशत कम वृद्धि होगी पूरे साल के लिए 5.6 फीसदी औसत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। हालांकि कोरोना वायरस महामारी से पहले यह अनुमान 6 फीसदी लगाया गया था।
चीन और चीनी सामानों के बहिष्कार और तिरस्कार के लिए संभवतः तैयार रही होगी, लेकिन पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के साथ हुए झड़प में चीन को चोट मिली, उसकी संभवतः उसको उम्मीद नहीं थी। यही कारण था कि उसने कोरोना काल में बर्बाद हुई चीनी अर्थव्यवस्था के बावजूद खासकर अमेरिका और भारत और अन्य पड़ोसी राष्ट्रों डराने के लिए चीन के रक्षा बजट को पिछले वर्ष की तुलना में और बढ़ा दिया। यह अलग बात है कि चीनी सामानों के विक्रेता नहीं मिलने से चीन बुरी तरह से कराह रहा है। कुछ कोरोना काल का असर था और बाकी उसकी हरकतों के कारण उसे यह भोगना पड़ा रहा है। गौरतलब है अगर भारत चीन से अपना कारोबार खत्म करता है तो भारत का चीन के साथ निर्यात और आयात का असंतुलन अधिक होने के कारण चीन की तुलना में भारत को अधिक नुकसान झेलना पड़ सकता है, जो करीब 18 अरब डॉलर (1.37 लाख करोड़ रुपए) का अनुमान है, जबकि चीन को 75 अरब डॉलर (करीब 5.7 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ेगा। चीन को यह नुकसान सिर्फ भारतीय कारोबार ठप होने से होगा, लेकिन कोरोनावायरस के लिए जिम्मेदार माने जा रहे चीन के खिलाफ वैश्विक रुप से भी एंटी चीन कैंपेन चल रहा है, जिससे चीन की आंखों के आगे अंधेरा छाना तय है।

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