चीनी सामानों के आयात को कम करने में भारत आया प्रथम स्थान पर, डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं अभिवादन:

भारत और चीन की हिंसक झड़प के बाद भारतीय जनता ने चीनी सामानों का खुलकर विरोध किया तथा पूरी देश केंद्र सरकार से अपील कर रहे थे कि वह चीनी सामानों की यादों को कम करें ताकि उनके अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव पड़े आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के उत्पादन में एकाधिकार को तोड़ने की वैश्विक लड़ाई के नेता बनकर उभरे हैं। अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्रेटबर्ट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि ये वो भूमिका है, जो अब अधिकतर मौकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खाली छोड़ देते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने अपना पहला राष्ट्रपति चुनाव मुख्य तौर पर चीन के खिलाफ सख्ती दिखाने के वादे के चलते जीता था, लेकिन हालिया दिनों में यह नीति बदलती दिखाई दी है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मोदी के ज्यादातर समर्थकों समेत भारतीय नागरिकों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पुतले फूंकना शुरू कर दिए। साथ ही ऐसे ऑनलाइन चैलेंज भी चालू हो गए, जिनमें भाग लेने वाले को चीनी उत्पाद कूड़े में फेंकते हुए अपनी फिल्म बनाकर अपलोड करने के चैलेंज दिए जा रहे हैं।

बीजिंग को गलत साबित करने वाला पहला देश रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के सरकारी मीडिया ने घमंड के साथ अपने आर्थिक प्रभुत्व पर जोर देते हुए अपने देश के बहिष्कार को आत्मघाती अभियान बताया था, लेकिन भारत बीजिंग को गलत साबित करने वाला विश्व का पहला मुख्य देश बन रहा है।

सप्लाई चेन पर ऐसा है अभी चीनी प्रभुत्व चीन फिलहाल विश्व के किसी अन्य हिस्से से ज्यादा माल का उत्पादन करता है और केवल पूर्ण उत्पाद बल्कि दुनिया की सप्लाई चेन के सबसे जटिल उत्पादों के आवश्यक हिस्सों के निर्माण में एकाधिकार के जरिये स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को परास्त कर देता है। एंटीबायोटिक से लेकर कंप्यूटर तक, कोई भी, दुनिया में कहीं पर भी कुछ भी निर्मित करता है तो यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को समृद्ध बनाता है।

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