चीन से आर पार के मूड में मोदी सरकार, BSNL और MTNL से बेदखल होंगे चीनी उपकरण, चीन को लगेगा इतने करोड़ का झटका

लद्दाख के गलवान घाटी में चीन की मक्कारी और धोखे के बाद अब भारत सरकार चीन से आर-पार के मूड में आ गई है, चीन को न सिर्फ सैन्य स्तर पर झटके देने की तैयारी है बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी चीन की कमर तोड़ने की तैयारी हो गई है. देश में गुस्से का माहौल है और चीनी सामानों के वहिष्कार की अपील की जा रही है. टेलिकॉम मंत्रालय ने BSNL और MTNL को निर्देश दिए हैं कि 4जी फैसिलिटी के अपग्रेडेशन में किसी भी चाइनीज कंपनियों के बनाए उपकरणों का इस्तेमाल न किया जाए, अगर कोई टेंडर दिया गया है तो पूरे टेंडर को नए सिरे से जारी किया जाए. चीनी उपकरणों को निकाल बाहर किये जाएँ और अगर कोई ठेका है तो उसे रद्द किया जाए. टेलिकॉम मंत्रालय ने निजी कंपनियों को भी सलाह दिया है कि वो चीनी उपकरणों और कंपनियों के साथ अपने जुडाव पर फिर से विचार करें.

मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही BSNL और MTNL ने बड़ा कदम उठाते हुए टेंडर को रद्द कर दिया. साथ ही देश के 5G डिप्‍लॉयमेंट्स के लिए चीनी ब्रांड्स Huawei और ZTE को प्रतिबंधित कर दिया गया है. भारतीय एयरटेल और वोडाफोन, दोनों ही अब तक Huawei और ZTE के साथ काम कर रहे थे. भारतीय टेलिकॉम इक्विपमेंट का सालाना बाज़ार 12,000 करोड़ रुपये का है. इसमें से एक-चौथाई पर चीन का कब्‍जा है. बाकी में बाकी में स्‍वीडन की एरिक्‍सन, फिनलैंड की नोकिया और साउथ कोरिया की सैमसंग की हिस्सेदारी है.

टेलिकॉम मंताराली के इस कदम के बाद चीन को भरी नुक्सान होगा. भारत और चीन के बीच द्वपक्षीय व्यापार में भारत हमेशा नुकसान में ही रहा है क्योंकि भारत चीन से आयात अधिक करता है और निर्यात कम. इसे ऐसे समझिये कि भारत चीन के लिए सबसे बड़ा बाज़ार है. भारतीय मार्केट के चीन की घुसपैठ हद से ज्यादा है. अगर भारत चीन को आर्थिक चोट देता है तो चीन की कमर टूटनी निश्चित है. क्योंकि अमेरिका के साथ उसका पहले से ही ट्रेड वॉर चल रहा है. ऑस्ट्रेलिया के साथ भी चीन ने रिश्ते बिगाड़ रखे हैं. भारत ने दिल्ली मेरठ RRTS कोरिडोर के अंडरग्राउंड स्ट्रेच का ठेका एक चीनी कंपनी को दिया था जिसे अब छीनने पर विचार हो रहा है.



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