कानपुर एनकाउंटर: वारदात के दौरान निश्चित विकास दुबे के साथ थे 30 से अधिक शूटर, पुलिस टीम कर रही है छानबीन:......

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ के दौरान 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे तथा सात पुलिसकर्मियों को घायल बताया जा रहा था। आपको बता दें कि दो पार्टियों के बीच हुए झड़प में पुलिस ने दबदबे बनाने के इरादे से गए इलाकों में विकास दुबे के 730 शूटर मौजूद थे जिन्होंने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करना शुरू कर दिया जिसके बाद यह घटना घटी। इस घटना के पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य में पूरी तरह से पुलिस टीमों की गर्मजोशी देखी जा रही है तथा योगी सरकार ने फैसला कर लिया है कि सभी बदमाशों को ढूंढ कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।
आपको बता दें कि कानपुर एंड काउंटर को अंजाम देने वाला मुख्य शख्स विकास दुबे अभी तक पुलिस की हिरासत से बाहर है सरकार ने इस बदमाश पर पूरे ₹100000 का इनाम भी लगा रखा है।
घायल पुलिसकर्मी के बयान के दौरान गांव में पहुंची पुलिस दवा देवी के इरादे के बाद विकास ने फोन कर 30 शार्प शूटरों को बुलाया था। उसने बताया कि शूटर अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। दयाशंकर ने बताया कि उसकी 315 बोर की रायफल से विकास ने भी पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। दयाशंकर ने बताया कि उसकी 315 बोर की रायफल से विकास ने भी पुलिस पर गोलियां चलाई थीं।

हमेशा साये की तरह विकास के साथ रहने वाला कल्लू, विकास की नौकरानी का पति है और सपरिवार उसके घर में ही रहता था।

उसके खिलाफ हत्या के प्रयास के दो मामलों सहित तीन मुकदमे कल्याणपुर थाने में दर्ज हैं। इन मुकदमों में विकास भी आरोपित है। बिकरू कांड में भी कल्लू 25 हजार का इनामी है। आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि दयाशंकर ने वारदात में शामिल कई अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। विकास और उसके साथी घर के पीछे खड़ी मोटरसाइकिलों से शिवली की ओर भाग गए थे।

यह बात आपको जरूर हैरान कर देगी इसके बाद हिस्ट्रीशीटर ने अपनी किलेबंदी कर ली। विकास के लिए थाने से मुखबिरी करने वाले और बिजली काटने के लिए फोन करने वाले का पता करने के लिए 95 पुलिसकर्मियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए हैं। इसमें चौबेपुर के 60 और 35 पुलिसकर्मी शिवराजपुर, शिवली और बिल्हौर थाने के हैं। इन सभी के मोबाइल की कॉल डिटेल, सेव नंबर और मैसेज की जांच की जा रही है। अभी तक पुलिस को कुल आठ लोगों पर मुखबिरी का शक था, जो अब केंद्रित होकर एक दारोगा और दो सिपाही पर सीमित हो गया है। हालांकि, अधिकारी इनके नाम जाहिर नहीं कर रहे हैं।

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