अमेरिका में आखिर क्यों बढ़ता जा रहा है कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या, मरीजों की संख्या बढ़कर हो गए 35 लाख के पार:

वैसे कहा जाए तो पूरी दुनिया को रोना महामारी को लेकर परेशान तो है ही परंतु आपको बता दें कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश संयुक्त राष्ट्र अमेरिका इस बीमारी से सबसे ज्यादा मुसीबतों से जूझ रहा है। इस देश में करुणा ने अपने सबसे अधिक मरीजों की संख्या में इजाफा किया है। अमेरिका में कोरोना से संकेत मरीजों की संख्या बढ़कर 35 लाख तक पहुंच चुकी है। परंतु आपको बता दें कि अभी तक किसी भी प्रकार से कोरोना बीमारी को रोकने का प्रावधान नहीं लगाया गया है।
अमेरिका में 1 लाख 37 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 7 जुलाई को तो अमेरिका ने एक दिन में रिकॉर्ड नए केस दर्ज किए। 60 हजार से ज्यादा। 
जमीन पर हालात बिगड़ रहे हैं। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अस्पतालों पर बोझ बढ़ गया है। आईसीयू भी अपनी क्षमता तक पहुँच गए हैं। एक बार फिर से हेल्थ केयर वर्कर्स को मास्क, ग्लव्स और पीपीई की कमी हो रही है। यूएसए टुडे के मुताबिक अमरीका में तो अब चीन से भी ज्यादा मामले हैं, वो चीन जहाँ सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण के मामले मिले थे।
अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फॉउची कोरोनावायरस पर व्हाइट हाउस के सलाहकार भी हैं। वो तो ये कह रहे हैं कि कम मृत्यु दर की बात पर जोर देना एक गलत नैरेटिव है।

उन्होंने आगाह किया है कि अभी तो अमेरिका में ये कोरोना की पहली लहर ही है और उसमें भी अमेरिका पूरी तरह धंसा हुआ है। लोगों ने एहतियात नहीं बरती तो हर दिन 1 लाख केस भी हो सकते हैं।

मार्च में ही फाउची ने अनुमान लगाया था कि अमेरिका में 1 लाख से 2 लाख के बीच मौतें हो सकती हैं। फिलहाल जो आँकड़ें हैं, वो उनके अनुमान को साबित कर चुके हैं।

अमरीका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी संस्था के डायरेक्टर डॉक्टर रॉबर्ट रेडफील्ड ने कहा था कि केस एक रिपोर्ट हो रही है और असल में 10 और लोग संक्रमित हैं। उनके मुताबिक देश में 5 से 8 फीसदी जनसंख्या संक्रमित हो चुकी है।

पिछले महीने सीडीसी की डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर ऐन शुकट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका... न्यूजीलैंड, सिंगापुर या दक्षिण कोरिया जैसी स्थिति में नहीं है, वहाँ नए केस जल्द से जल्द पता कर लिए जाते हैं और कांटेक्ट ट्रैसिंग कर लोगों को आइसोलेट किया जाता है। लेकिन अमेरिका में फिलहाल बहुत ज्यादा वायरस फैला हुआ है।

मृत्यु दर कम होने पर सरकार का जोर तो जो बार-बार मृत्यु दर के कम होने की बात पर जोर दिया जा रहा है और कई देशों की सरकारें ऐसा कर रही हैं, उसको लेकर एक्सपर्ट्स आगाह करते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कोरोना से संक्रमित बुजुर्ग मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने की नौबत ज्यादा आती है और बुज़ुर्ग ही इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

सीडीसी के आँकड़ों के मुताबिक हर 10 में से आठ मौतों में मरीज की उम्र 65 साल से ज्यादा थी। लेकिन अब तो बहुत युवा मरीज भी कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं और उनमें मौत होने के चांस बेहद कम हैं।

जैसे अमेरिका के एरिजोना राज्य में आधे मामलों में तो मरीजों की उम्र 20 से 44 साल है। टैक्सस में आधे से ज्यादा मामले 50 साल से कम उम्र के हैं। तो जब मृत्यु दर निकाली जाती है तो वो कम ही निकलती है। दूसरी बात ये कि कोविड 19 संक्रमण का नतीजा सिर्फ मौत ही नहीं होता। लोगों में ठीक होने के बाद भी शारीरिक और मानसिक समस्याएँ रहती हैं।

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