देश में सिर्फ 6 बैंको को छोड़कर सभी बैंक होंगे प्राइवेट, ग्राहकों पर पड़ेगा इसका कैसे असर पूरी जानकारी जाने:

बड़ी संख्या में बैंकों के निजीकरण की तैयारी

इंश्योरेंस कंपनियों से भी सरकारी हिस्सेदारी होगी खत्म

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बड़े वित्तीय फैसले से पहले 6 बैंकों को छोड़ कर बाकी सभी बैंकों के निजीकरण पर सहमति बनाई है। जिसकी औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। चरणबद्ध तरीके से निजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पहले चरण में 5 सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बेची जाएगी। सबसे पहले Bank of Maharashtra, IOB की बारी होगी, इसके बाद Bank of India, Central Bank of India को भी प्राइवेटाइज किया जाएगा। इसी फेहरिस्त में UCO Bank भी शामिल है।

हालांकि सरकारी बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया में ग्राहक हितों का पूरा ध्यान दिया जाएगा। इस बारे में कैबिनेट ड्राफ्ट नोट भी तैयार होने की बात कही जा रही है। हालांकि निजीकरण के व्यापक विरोध की भी आशंका जताई जा रही है। खासकर कर्मचारियों की तरफ से इसकी मुखालफत की जाएगी। साथ ही इस बड़े फैसले पर सरकार को विपक्षी पार्टियों से भी निपटना होगा।

भारत में इंश्योरेंस का बाजार काफी बड़ा है। सरकार में बनी ताजा सहमति के मुताबिक LIC और एक नॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को छोड़कर बाकी सभी इंश्योरेंस कंपनियों में सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी किश्तों में बेचेगी। इससे इंश्योरेंस बाजार में प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी और अंतिम तौर पर ग्राहकों को फायदा होने की उम्मीद की जा रही है। इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश को भी सीमित निवेश की इजाजत है। लिहाजा इस सेक्टर में आने वाले समय में कॉम्पिटीशन बढ़ेगा। बता दें कि फिलहाल सरकार के जिम्मे LIC के अलावा 6 जनरल इंश्योरेंस और एक National Reinsurer कंपनियां है। सरकार के इस फैसले का दूरगामी असर होने की संभावना जताई जा रही है।

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