7 साल बाद इस लड़की ने अपनी इज्जत बचाने वाले मजदूर को इस तरह से चुकाया एहसान कि सब रह गए हैरान: पढ़े विस्तार से

यह एक ऐसी घटना है जिसको सुनकर आप हैरान रह जाएंगे,आपको बता दें कि जब कोई इंसान किसी की मदद करता है तो उसे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी महसूस होती है भले ही वह अपने किए हुए मदद को भूल गए परंतु जिस इंसान के ऊपर वाह मदद करता है वह इस घटना को कभी नहीं भूल सकता इस सच्चाई पर आधारित या घटना विस्तार से पढ़ें,
शिवदास विभूतीपुरा जिला कोलार, कर्नाटक का रहने वाला है। शिवदास के परिवार में उसकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। शिवदास उस दिन भी अपने कोलार से काम करके अपने गाँव वापस आ रहा था। रोजाना तो वह अपने तीन साथियों के साथ आता जाता था किन्तु उस दिन उसे काफी काम था। इस लिए रात का 9 बज गया था। 

उसने अपनी साइकिल उठाई और गाँव के लिए चल दिया। कोलार से 5 किलोमीटर निकलने के बाद उसने देखा कि रोड के किनारे खेतों से काफी आबाजें आ रहीं थीं। आवाजें सुनकर शिवदास रुक गया।

उसके रुकते ही किसी लड़की की चीज सुनाई दी। शिवदास ने अपने बारे में कुछ नहीं सोंचा और वह खेतों की तरफ भाग खड़ा हुआ। पास जाकर जब शिवदास ने देखा तो वह हैरान रह गया। एक मासूम सी लड़की के साथ तीन लड़के जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे। अचानक जब शिवदास वहां पहुँच गया तो लड़कों ने लड़की को छोड़ शिवदास को पीटना शुरू कर दिया। शिवदास भी उनसे लड़ता रहा। लड़कों ने शिवदास को मार -मार कर लहुलुहान कर दिया किन्तु शिवदास हिम्मत नहीं हारा और मजबूर होकर उन लड़कों को वहां से भागना पड़ा।

शिवदास काफी जख्मी हो गया था किन्तु उसकी हिम्मत नहीं टूटी। उसने लड़की को साईकिल पर बैठाया और कोलार में उसके घर केईबी कालोनी में छोड़ दिया, लेकिन अब उसके पास हिम्मत नहीं थी। इस लिय वह उस लड़की के घर में ही गिर गया। जब उस लड़की के परवार वालों ने यह सब देखा तो वह हैरान रह गएँ। उन्होंने रामदास को निकट के अस्पताल में भर्ती कराया। उस लड़की का नाम रश्मी गुप्ता था।

उसके पिता सेना में एक अधिकारी थे। उस दिन वह अपने एक दोस्त के साथ घूमने गई थी और उसी समय उन तीन लड़कों ने उसे दबोच लिया। यह सब देख उसका दोस्त दुम दबा कर भाग गया और शिवदास ने उसकी मदद की। रश्मी उस समय होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी। शिवदास तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा और रश्मी उसका अच्छी तरह से देखभाल करती रही। शिवदास ठीक हो गया और अपने घर आ गया। इस घटना के सात साल बाद शिवदास रोज की तरह मजदूरी करने शहर गया हुआ था और रश्मी और उसके पिता अविनाश गुप्ता उसके घर पर पहुँच गए। शिवदास की पत्नी ने बताया कि वो तो शाम तक घर आयेंगे। रश्मी और उसके पिता शाम तक उसका इंतजार करते रहे। शाम को जब शिवदास घर आया तो अपने घर के पास पुलिस वालों को देखकर घबरा गया।

उसके मन में किसी अनहोनी की शंका आ रही थी लेकिन जब वह घर गया तो उसने देखा कि सेना का एक अधिकारी और एक खूबसूरत लड़की उसके घर में बैठे हुए हैं। रश्मी के पिता के साथ तीन और फ़ौजी दोस्त आये हुए थे। शिवदास कुछ समझ नहीं पा रहा था। इतने में ही रश्मी ने उठाकर शिवदास के पैर छुए और उसे सात साल पुरानी घटना याद दिलाई। शिवदास उस घटना को एक सपना समझ कर भूल गया था किन्तु रश्मी उस घटना को कैसे भूल सकती थी, जिसमें उसे नया जीवन मिला था।

रश्मी के पिता ने शिवदास को कोलार में एक घर खरीद कर दिया और एक ऑटो रिक्शा। आज शिवदास मजदूरी नहीं करता है, ऑटो चलाता है। रश्मी ने बंगलौर में एक होटल खोल रखा है और अक्सर शिवदास से मिलने आती रहती है। रश्मी अभी भी कुंवारी है और बंगलौर में शिवदास के दोनों बच्चों को अपने पास रखकर पढ़ा रही है। आपको बता दें इस घटना को हमारे पास बंगलौर से रश्मी की एक सहेली ने yaarokayar ब्लॉग के मेल पर भेजा है। दोस्तों हमें भी सदैव दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहना चाहिए क्योंकि किसी की मदद करना दुनिया का सबसे बड़ा पुन्य माना जाता है।

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