वैज्ञानिकों ने खोजा कोरोना का 8 प्रकार का रंग बदलना, इससे ज्यादा नहीं बदल सकता है अपना रूप वैक्सीन बनाने में होगी मददगार:

पूरी दुनिया कोरोना से परेशान थी तथा दुनिया के अच्छे से अच्छा वैज्ञानिक को रोकना का वैक्सीन बनाने में लगा हुआ था परंतु आपको बता दें कि करुणा के बदलते रूप के चलते इसके बनाए गए vaccine किसी काम के नहीं निकल पा रहे थे।पिछले 80 दिन से मरीजों में अब सिर्फ वायरस का एक तरह का स्ट्रेन ही पाया जा रहा है। वायरस की इसी चाल का विश्लेषण करने के बाद भारतीय वैज्ञानिकों को वैक्सीन खोजने का रास्ता मिला। इसी महीने के अंत तक मानव परीक्षण पूरा हो जाने के बाद अगले माह टीका जारी करने की दिशा में वैज्ञानिक बढ़ जाएंगे। आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी गवाह बनने जा रही इस वैक्सीन (बीबीवी-152) विज्ञान जगत में भी नया इतिहास रचेगी। यह कैसे संभव हुआ और अब आगे किस रणनीति पर काम होगा, इन्हीं पहलुओं पर परीक्षित निर्भय की रिपोर्ट... 
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ निदेशक ने बताया कि वैक्सीन हर किसी को तत्काल नहीं मिलेगी। इसके प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं। सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों, फिर पुलिस जवान और आपदा प्रबंधन में जुटे कर्मचारियों को दी जाएगी। दुष्प्रभाव न मिलने पर इसे किस आयु वर्ग को पहले देना है और किसे नहीं, यह भी तय किया जाएगा। वहीं, वैक्सीन की उपलब्धता पर भी काम शुरू हो जाएगा।
बायो एथिक्स के प्रोफेसर और शोधकर्ता अनंतभान का कहना है कि वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में है, लेकिन आईसीएमआर के आदेश से लगता है कि सब पहले से ही तय है। 2 जुलाई को आदेश, सात जुलाई तक पंजीयन और 15 अगस्त से पहले लॉन्चिंग, महज एक महीने से कम समय में कैसे संभव है? जबकि क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री-इंडिया (सीटीआरआई) में एक जुलाई को इसका पंजीयन हुआ है।

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