विकास दूबे पर एक बड़ा खुलासा : अगर गोली मिस नहीं तो शहीद हुए 8 पुलिसकर्मी आज जिंदा होते

बलरामपुर. कानपुर एनकाउंटर में एक बड़ा ही खुलासा हुआ है। बलरामपुर में न्यायालय सम्मन सेल में तैनात सिपाही देवेन्द्र प्रताप सिंह ने विकास दूके की कहानी का एक पन्ना और खोला हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि विकास दूबे की रंजिश शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा से नहीं बल्कि उनसे थी।

बलरामपुर में न्यायालय सम्मन सेल में तैनात सिपाही देवेन्द्र प्रताप सिंह का दावा है कि 10 जुलाई को एनकाउंटर में मारे गये गैंगेस्टर विकास दूबे की रंजिश शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा से नहीं बल्कि उनसे थी। दिसम्बर 1998 में हुई घटना का जिक्र करते हुए देवेन्द्र ने बताया कि उन दिनों हरिमोहन सिंह एसएचओ के साथ स्पेशल स्क्वायड में उनकी तैनाती कानपुर नगर के कल्याणपुर थाने में थी। भाजपा नेता संतोष शुक्ला (जो बाद में राज्यमंत्री हुए) से सूचना मिली कि शातिर अपराधी विकास दूबे किसी वारदात को अंजाम देने के लिए निकला है।

गोली विकास दूबे के कान को छूकर निकल गई :- सूचना मिलते ही तत्कालीन एसएचओ हरिमोहन सिंह ने विकास दूबे को रोकने के लिए थाने के सामने बैरिकेटिंग करा दी और दो सिपाहियों को देवेन्द्र सिंह व संजय सिंह को ड्यूटी पर लगा दिया। देवेन्द्र को पता था कि ये शातिर किस्म का अपराधी है इसलिए वे बैरिकेटिंग से 15 मीटर दूर पर खड़े हुए। बैरिकेटिंग के पास बुलेट आता देख एसएचओ हरिमोहन सिंह ने हाथ देकर रोकने का प्रयास किया तो विकास ने फायरिंग करते हुए हरिमोहन सिंह पर बुलेट चढ़ा दी। इसके बाद विकास ने भागने की कोशिश की लेकिन सिपाही देवेन्द्र सिंह व संजय सिंह ने बाइक से उनका पीछा किया। बाइक पर पीछे बैठे देवेन्द्र सिंह ने विकास पर फायरिंग भी की लेकिन गोली उसके कान को छूकर निकल गई।

थाने में देवेन्द्र सिंह ने विकास दूबे की जमकर खातिरदारी की :- जिसके बाद देवेन्द्र ने विकास की बाइक को छलांग लगाकर गिरा दिया और विकास को दबोच लिया। देवेन्द्र सिंह ने विकास को करीब 25 सेकेण्ड तक दबोचे रखा जिसके बाद फोर्स आ गई और उसे थाने ले जाया गया। थाने में देवेन्द्र सिंह ने विकास दूबे की जमकर खातिरदारी की जिसके बाद जेल जाते वक्त वो अपने पैरों पर चल नहीं पा रहा था। देवेन्द्र सिंह ने बताया कि उस वक्त यदि गोली मिस ना होती तो आज शहीद हुए 8 पुलिसकर्मी जिंदा होते। देवेन्द्र सिंह का कहना है कि विकास की वजह से उनको कानपुर छोड़ना पड़ा और उसी की पहुंच और रसूख के बल पर दर्ज हुए फर्जी मुकदमे के कारण वे आज भी एक सिपाही है।

विकास दूबे की अपने दुश्मनों पर खास नजर :- विकास दूबे अपने दुश्मनों पर खास नजर रखता था। जनवरी 1999 में एसआई शीशपाल और देवेन्द्र सिंह पर दर्ज हुए फर्जी मुकदमें में वर्ष 2005 में एसआई शीशपाल तो बरी हो गये लेकिन विकास दूबे ने अपने रसूख के बल पर न्यायालय से केस की फाइल ही गायब करवा दी। जिसके कारण वो फर्जी मुकदमा आज भी लम्बित है और इसी के कारण देवेन्द्र प्रताप सिंह का प्रमोशन नहीं हुआ वे आज भी एक सिपाही हैं।

दूसरा पैर भी खराब कर दूंगा :- बिल्हौर सर्किल में तैनात शहीद सीओ देवेन्द्र मिश्रा तेजतर्रार थे उनकी नजर गैंगेस्टर विकास दूबे पर थी। जब सीओ देवेन्द्र मिश्रा ने विकास दूबे से कहा कि तुम्हारा एक पैर खराब है दूसरा पैर भी खराब कर दूंगा तो विकास को यकीन हो गया कि ये वही सिपाही है जिसने 22 साल पहले लाॅकअप में उसकी पिटाई की थी। जबकि ऐसा नहीं था। उसी रंजिश के कारण विकास दूबे ने 02 जुलाई को की रात बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों सहित सीओ देवेन्द्र मिश्रा की निर्मम हत्या कर दी।

बलरामपुर एसपी ने की पुष्टि :- देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कानपुर नगर के थानों में रहते गई गुडवर्क किये। उनके साथ के सभी पुलिसकर्मियों का प्रमोशन हो गया लेकर वे आज भी एक काॅस्टेबल ही हैं। इस सब के बावजूद वे अपनी ड्यूटी और काम से काफी संतुष्ट नजर आते हैं। बलरामपुर के एसपी देव रंजन वर्मा भी देवेन्द्र प्रताप सिंह की दिसम्बर 1998 के दौरान कानपुर नगर के कल्याणपुर थाने में पोस्ट होने की पुष्टि की है।



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