कोरोना संक्रमण ने छीना सपना, वेटलिफ्टिंग में करियर अधूरा

फर्रुखाबाद. फतेहगढ़ ग्रानगंज निवासी युवक सौहीद अहमद का सपना था कि वह अच्छा वेटलिफ्टर बनकर देश का नाम रोशन करे। इसे लेकर वह प्रतिदिन ब्रह्मदत्त द्विवेदी स्टेडियम में दो घंटे प्रैक्टिस करता था। वह एक क्विंटल तक वजन उठा लेता था। स्टेडियम के प्रशिक्षक सरवेंद्र सिंह ने प्रतिभा देखकर चार वर्ष पूर्व उसे निःशुल्क प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था। वह स्टेडियम में आने वाले लोगों से आर्थिक मदद लेकर सौहीद को जूते,कपड़े भी दिलाते रहते थे।

सौहीद कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, मुजफ्फरनगर समेत चंडीगढ़ में हुई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुका है। मार्च में कारोना के संकट के बाद से स्टेडियम में ताला लग गया है। सौहीद के पिता चक्की चलाते हैं। उससे ही पूरे परिवार का भरण-पोषण हो रहा है,लेकिन अब ज्यादातर लोग पैकेट का आटा बाजार से खरीदते हैं। इससे चक्की से परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा है।सौहीद की मां घर पर कपड़े सिलने का काम करने लगीं और भाई तौकीर बीटीसी कर रहा है। बहन नइयर बानो भी पढ़ाई कर रही है।

सौहीद इंटरमीडिएट के बाद से अपना कॅरियर वेटलिफ्टिंग में तलाश रहा था,लेकिन हालात से मजबूर होकर मजबूत हाथों ने अब नाई की दुकान में कैंची थाम ली है। अभी व काम सीख रहा है। इससे अभी उसको उस्ताद रुपये नहीं दे रहे हैं। काम सीखने के बाद वह तीन से चार सौ रुपये रोज कमा सकेगा। वहीं सौहीद ने बताया कि वेटलिफ्टिंग गरीबों के लिए नहीं है। सरकार भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मदद के लिए कुछ नहीं कर रही है। परिवार चलाने के लिए वह बाल काटना सीख रहा है। हालांकि वह वेटलिफ्टिंग को नहीं छोड़ेगा।



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