देश की झारखंड राज्य से निकला ऐसा खजाना जिससे खत्म हो जाएगी चीन से आने वाली वस्तुओं पर से निर्भरता, आखिर क्या है वस्तु आइए जाने:

भारत और चीन के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद देश में चीनी सामानों का लगातार बहिष्कार हो रहा है परंतु आपको बता दें कि कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जो अगर चीन से आयात ना की जाए तो भारत में उसकी कमी अवश्य ही महसूस की जाएगी परंतु भारत के राज्य झारखंड से जो पहले से ही लौह तत्व का सबसे बड़ा भंडार माना जाता है वहां पर टंगा स्टैंड की बहुत बड़ी भंडार का पता चला है जो भारत को इस मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है. इससे चीन पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। गढ़वा जिले के सलतुआ इलाके में टंगस्टन के भंडार की जानकारी मिली है. जीएसआई ने केंद्र सरकार को इस भंडार के बारे में अवगत करा दिया है। (सभी तस्वीरें सांकेतिक हैं)

बता दें कि टंगस्टन रेयर अर्थ एलिमेंट की श्रेणी में आता है. जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) इसपर काम कर रही है. फिलहाल यह जी 3 स्टेज में है। यानी अभी इसकी मैपिंग की जा रही है. जीएसआई के सूत्रों के अनुसार इस साल के अंत तक मैपिंग और ड्रिलिंग शुरू कर दी जाएगी।

भारत अभी 100 फीसदी टंगस्टन का आयात करता है. टंगस्टन का सबसे बड़ा निर्यातक देश चीन है. चीन में 56 %, रूस में 5 %, वियतनाम में 3 % और मंगोलिया में 2 % टंगस्टन पाया जाता है. चीन के साथ व्यापार कम होने की स्थिति में देश के लिए टंगस्टन का नया भंडार काफी कारगर साबित होगा।

एक समय में टंगस्टन का सबसे ज्यादा प्रयोग बिजली के बल्ब में किया जाता था. हालांकि अब फाइटर जेट, रॉकेट, एयरक्राफ्ट, एटॉमिक पावर प्लांट, ड्रिलिंग और कटिंग टूल्स, स्टेनलेस स्टील के वेल्डिंग , इलेक्ट्रोड, फ्लोरेसेंट लाइटिंग, दांत के इलाज के अलावा उच्च तापमान वाली जगह में इसका इस्तेमाल होता है।2200 डिग्री सेंटीग्रेट तक तापमान वाली जगह पर इसका प्रयोग किया जा सकता है. लोहा में इसके मिश्रण से उसकी ताक़त बढ़ जाती है।

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