सीमा के गलवान नदी में आई बाढ़, चीनी सैनिकों के लगाए टेंट बह गए पानी में, हटना पड़ेगा चीनी सैनिकों को पीछे:

भारत और चीन के बीच लगातार तनाव जारी है तथा चीनी सेना गलवान घाटी के पीछे हटने का नाम भी नहीं दे रही है।आपको बता दें कि जिस बलवान घाटी में चीनी सेना अपना दावा कर रही है उसी गढ़वा में घाटी पर बहुत तेज गलवान नदी में लगातार बारिश का पानी बढ़ते जा रहा है जो चीनी सैनिकों के लिए दुश्मन का कारण बन रहा है।बलवान नदी के किनारे बसे चीनी सैनिक अब वहां से पीछे हट चुके हैं तथा उनके द्वारा लगाए गए सीमा पर का टेंट पूरी तरह से बहुत चुका है। यह अक्साई चिन क्षेत्र में उत्पन्न होती है, जो चीन के क़ब्ज़े में है लेकिन भारत इस पर अपनी सम्प्रभुता मानता है। यह नदी काराकोरम की पूर्वी ढलानों में सामज़ुंगलिंग के पास आरम्भ होती है और पश्चिमी दिशा में बहकर श्योक नदी में विलय कर जाती है। मई के बाद भारत से तनाव बढ़ने पर चीन की सेना ने गलवान नदी के किनारे अपने कैम्प लगा दिए थे।
उपग्रह और ड्रोन की तस्वीरों से पता चलता है कि चीनी पीएलए के टेंट गलवान के बर्फीले बढ़ते पानी में पांच किलोमीटर गहराई में बह गए हैंं. काफी तेजी से बर्फ पिघलने के कारण नदी के तट पर इस समय स्थिति खतरनाक है. चीन यहां से पीछे हटने के बाद अधिक से अधिक नई तैनाती करने में जुट गया है लेकिन गलवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग झील में मौजूदा स्थिति के चलते चीनी सेना की तैनाती लंबे समय के लिए अस्थिर हो गई है. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पूरी ताकत से भारतीय सेना और वायुसेना की तैनाती के बाद अब भारतीय नौसेना को स्टील की नौकाओं के साथ पैंगोंग झील में उतारे जाने की तैयारी है. गश्ती नौकाओं के ऊपरी हिस्से को काट दिया जा रहा है. ताकि उन्हें तैनाती के लिए मुंबई से सी-17 मालवाहक विमान से लेह तक पहुंचाया जा सके. पीएलए की भारी गश्ती नौकाओं की ही तरह यह भी गन माउंट्स वाली स्टील की नावें हैं, जिनका इस्तेमाल चीन ने झील के उत्तरी किनारे पर किया था. हालांकि भारतीय नौसेना की विशेष टीम पहले से ही पैंगोंग झील में अतिरिक्त 24 अग्रिम लड़ाकू मोटरबोट के साथ तैनात है. गलवान घाटी क्यों है महत्वपूर्ण गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चिन के बीच भारत-चीन सीमा के नजदीक है. यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चिन को भारत से अलग करती है. अक्साई चिन पर भारत और चीन दोनों अपना दावा करते हैं. यह घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली है. ये क्षेत्र भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख की सीमा के साथ लगा हुआ है. सन 1962 के युद्ध में भी गलवान नदी का यह क्षेत्र जंग का प्रमुख केंद्र रहा था. इस घाटी के दोनों तरफ के पहाड़ रणनीतिक रूप से सेना का बर्फीली हवा से बचाव करते हैं, क्योंकि यहां जून की गर्मी में भी तापमान शून्य डिग्री से कम होता है. भारत गलवान घाटी में अपने इलाके में सड़क बना रहा है जिसका चीन विरोध कर रहा है. दारबुक-श्‍योक-दौलत बेग ओल्‍डी रोड भारत को इस पूरे इलाके में बड़ा फायदा देगी क्योंकि यह रोड काराकोरम पास के नजदीक तैनात जवानों तक सप्‍लाई पहुंचाने के लिए बेहद अहम है।

Advertisement