भारत ने रचा चीन के खिलाफ एक और नया कूटनीति, अब बना रहा है इस विचार पर सहमति:

भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत पूरी तरह से चीन के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार है। आपको बता दें कि इस वक्त स्थिति युद्ध की हो गई है। परंतु अभी तक किसी भी देश की तरफ से युद्ध का ऐलान नहीं किया गया है भले ही सीमा पर किसी भी प्रकार का गोलीबारी ना हो परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ कई प्रकार के खेल खेल दिए हैं। आपको बता दें कि भारत के रेलवे विभाग में चीन द्वारा लिए गए प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया जिसके बाद चीनी सरकार को बहुत ही आर्थिक नुकसान का सामना करना। इसके बावजूद चीन से आने वाले ऐसे वस्तुओं का आयात रोक दिया गया है जिसका भारत में कोई ज्यादा महत्व नहीं है। आपको बता दें कि पिछले दिनों केंद्र सरकार की योजनाओं द्वारा भारत में 59 चीनी मोबाइल ऐप को बैन कर दिया गया जिसके उपरांत सीन पूरी तरह से डगमगाए चुका है और उसने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का गुहार लगाया है।
अब भारत चीन के विरोध एक और नया तरीके का युद्ध छेड़ा है जिसके अंतर्गत हिंदुस्तान ने हांगकांग, तिब्बत, ताइवान, समेत उइगुर मुसलमान समते चीन के तमाम दुखती रग को छेड़ना शुरू कर दिया है।

हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए सुरक्षा कानून के खिलाफ लंबे समय से प्रदर्शन हो रहा है। चीन इस कानून के जरिए हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता खत्म करने की फिराक में है। हॉन्ग कॉन्ग में चीन के इस कदम की दुनिया भर में आलोचना हो रही है। इस मसले पर भारत ने भी खुलकर बयान दिया है। भारत ने कहा है कि सभी संबंधित पक्षों को उचित, गंभीर और वस्तुगत तरीके से इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए।

गौरतलब है कि 1997 तक हॉन्ग कॉन्ग ब्रिटिश उपनिवेश रहा। लेकिन 1997 में ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग को 'एक देश, दो व्यवस्थाएं' (वन नेशन, टू सिस्टम) के तहत चीन को सौंप दिया। हालांकि इसके हॉन्ग कॉन्ग को राजनीतिक और कानूनी स्वायत्तता हासिल है। लेकिन चीन अब हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता को खत्म कर उस पर अपना पूरा नियंत्रण करना चाहता है। चीन की इस चाल के खिलाफ हॉन्ग-कॉन्ग में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और वहां खूब विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। दुनियाभर के तमाम देश चीन की आलोचना कर रहे हैं। वहीं लंबे समय से इस मसले पर खामोश रहने वाले भारत अब चुप्पी तोड़ी है।

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