पांच हजार से अधिक जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों में गो-आश्रय स्थलों बनाने की योजना

लखीमपुर खीरी. कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में गोवंश आश्रय स्थलों के जनपद स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा हेतु बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में पांच हजार से अधिक जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतों में नई गो-आश्रय स्थल की रणनीति तैयार कर निर्माण किया जाए। डीएम ने कहा कि प्रत्येक विकासखंड पर एक गो-आश्रय स्थल ऐसा तैयार किया जाए जो आत्मनिर्भर हो और उस आश्रय स्थल से कम से कम 100 किसान सीधे जुड़े हो। डीएम ने कहा कि गो आश्रय स्थल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उसमें वर्मी एवं ऑर्गेनिक कंपोस्ट का निर्माण, उपले का निर्माण, गोबर के उत्पाद का निर्माण, मत्स्य एवं कुक्कुट पालन, जीवामृत का निर्माण सहित अनेक गतिविधिया चलाकर आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। जिले की सभी गो आश्रय स्थलों में व्यापक स्तर पर उद्यान एवं वन विभाग के निर्देशन में अनुकूल वातावरण अनुसार छायादार एवं फलदार वृक्षों का रोपण किया जाए।

डीएम ने कहा कि गो-आश्रय स्थल का संचालन मुख्यमंत्री जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। आश्रय स्थलों का बेहतर संचालन सभी विभागों के समेकित समन्वय से ही संभव है। इसी के साथ डीएम ने जिले में तीसरे बृहद गो आश्रय स्थल के निर्माण के संबंध में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि विकास खंडों पर आयोजित होने वाली साप्ताहिक बैठकों में गो आश्रय स्थलों के स्वावलंबन पर चर्चा की जाए। डीएम ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वह अपने अपने क्षेत्र अंतर्गत चारागाह की जमीनों को चिन्हित कर चारे की बुवाई कराएं। उन्होंने बताया कि लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी आश्रय स्थल का नियमित सत्यापन एवं सप्ताह में एक बार अनिवार्य रूप से सत्यापन करें इसमें किसी प्रकार की लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं है। डीएम ने सभी बीडीओ को निर्देश दिये कि सभी गो आश्रय स्थलों पर अतिरिक्त शेड का निर्माण कराया जाए।

प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर बने चारगाह

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. टीके तिवारी ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 25 अस्थाई व दो वृहद गांव संरक्षण केंद्र संचालित है। इसी के साथ जिला पंचायत के तीन और नगर निकायों के छह गो-आश्रय स्थल एवं 11 कांची हाउस का भी संचालन कर निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था पशुपालन विभाग द्वारा की जा रही है। बैठक में गो आश्रय स्थल के चयन, निर्माण एवं संचालन में आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और कई अहम निर्णय लिए गए। उपायुक्त मनरेगा राजनाथ भगत ने गोवंश आश्रय स्थलों को स्वावलंबन बनाए जाने पर अपने विचार व्यक्त किए और प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक चारागाह बनाए जाने की बात कही। बैठक में गौ सेवकों का श्रम भुगतान, भूसा भंडार गृह का निर्माण, नेपियर घास का उत्पादन, आश्रय स्थल की विभिन्न पंजिकाओं का समय अपडेशन, जीवामृत का निर्माण, गोबर उत्पाद एवं उनका विपणन, भूसे की उपलब्धता, हरे चारे की उपलब्धता सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह, पुलिस उपाधीक्षक अभिषेक प्रताप सिंह, एसडीएम डॉ. अरुण कुमार सिंह, ओपी गुप्ता, दिग्विजय सिंह, अखिलेश यादव, उपायुक्त मनरेगा राजनाथ भगत, खण्ड विकास अधिकारी आलोक वर्मा, अरुण सिंह, देवेंद्र सिंह, विनय मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. टीके तिवारी, सहित विभिन्न पशु चिकित्सा अधिकारी एवं अधिकारी मौजूद रहे।

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