जिंदा युवा को किया कोरोना से मृत घोषित, अंतिम संस्कार कराने के दौरान पत्नी से बोला मैं जिंदा हूं,, पढ़े पूरी खबर:

मुंबई शहर से एक अजीबोगरीब सूचना मिल रही है जिसमें एक कोरूणा से संक्रमित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया इसे प्रशासन की लापरवाही समझा जाए या अस्पताल का ना कामयाबी। यही नहीं आपको बता दें कि अधिकारियों द्वारा 13 मई को शव जलाने के बाद अभिभावकों को प्रमाणपत्र तक सौंप दिया गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जौनपुर जिले में मडिय़ाहूं थाना क्षेत्र के सलारपुर बुजूर्गा का मामला है। अब चार जुलाई को बेटे ने घर पर फोन कर जान बचाने की गुहार लगाई तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुत्र की जान बचाने को माता-पिता पुलिस व लोगों के समक्ष दर-दर की फरियाद लगा रहे हैं।
शिकायती पत्र में मां प्रभावती देवी का कहना है कि उनका पुत्र मुकेश रोजी-रोटी के सिलसिले में महाराष्ट्र के मुंबई स्थित नालासोपारा के वाकंपाड़ा में रहता था। पिछले तीन मई को जब वह बीमार हुआ तो नालासोपारा में ही बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां छह मई को चिकित्सकों द्वारा कैंसर की बीमारी बताकर महाराष्ट्र के ही केएम हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। केएम हॉस्पिटल में 10 मई को यह कहा जाता है कि आपका पुत्र कोरोना वायरस से पीड़ित है, फिर उसे कोविड-19 वार्ड में भर्ती करा दिया गया। जहां 12 मई को मुकेश जब अपने मामा से बात कर रहा था तभी 15 मिनट बाद उसकी मोबाइल छीनकर स्वीच ऑफ कर दिया गया।
आधे घंटे बाद परिजनों को सूचना मिली कि उसकी कोरोना से मौत हो गई। उसका शव परिजनों को 12 मई को प्लास्टिक से बांधकर सौंप दिया गया। उसके शव को जलाने के दौरान चेहरा भी नहीं देखने दिया गया। बीती चार जुलाई को मुकेश ने पत्नी सुनीता के मोबाइल पर फोन से बात की । बातचीत में रो-रो कर कहा कि वह बुरी तरह से फंस गया है, उसकी जान खतरे में है। दोबारा फोन करने पर मोबाइल स्वीच ऑफ बता रहा है।

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