कारगिल विजय दिवस : न्याय के लिए दर-दर भटक रहा कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला बीएसएफ जवान

मिर्ज़ापुर. देश आज कारगिल विजय दिवस मना रहा है। मगर इस कारगिल युद्ध मे विजय पदक का सम्मान पाने वाले बीएसएफ जवान अपने साथ हुए ठगी को लेकर थाने और चौकी के चक्कर काट रहे है। वर्तमान में भारत-बांग्लादेश बार्डर पर देश की रक्षा के लिए तैनात यह जवान अपने घर में ही पिछले 7 वर्षों से ठगे गये पैसे निकालने के लिए मुश्किलें झेल रहा है।

कारगिल युद्ध के दौरान देश के लिए सरहद पर दुश्मनों से मुकाबला कर उनको परास्त कर जीत का तिरंगा लहराने वाले बॉर्डर सिक्योरटी फोर्स (BSF) के जवान जय प्रकाश सिंह ने सपने में भी नही सोचा था कि एक दिन अपने देश मे न्याय के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ेगा। जमालपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले जवान जयप्रकाश सिंह के अनुसार स्थानीय आलु बियार के कहने पर उसके रिश्तेदार सुखराम, लुज्जन, नथुनी, मोती, सालिक ग्राम रीवा थाना जमालपुर से वर्ष 2013 में 6 बीघा जमीन खरीदने को लेकर तीन साल के लिए बीस लाख पैंतीस हजार रुपए में जमीन का एग्रीमेंट अपने ससुर, पत्नी और भाई की पत्नी के नाम कराया। जिसमे से उन्होंने 9 लाख रुपया पूरे दिया और डेढ़ लाख रुपया स्टाम्प पर खर्च किया। पिछले सात साल में न तो जमीन मिल सकी और न ही पैसा वापस हो सका है। उन्हें बाद में पता चला कि जमीन विवादित है। जिसके बाद उसने पैसे वापस करने के लिए कहा मगर अभी तक पैसा वापस नही मिला। पैसे वापस पाने के लिए वह बार बार पुलिस से गुहार लगा रहे और थाने का चक्कर काट रहे है।

जय प्रकाश सिंह का कहना है कि अब तो पैसे वापस देने के बजाय उन्हें फंसाने का प्रयास शातिर ठग लोग कर रहे। यह मेरे लिए मानसिकतौर पर बहुत कष्टकारी है। जवान जयप्रकाश सिंह का कहना है वह बीएसफ में 1997 को भर्ती हुये इसके बाद पोस्टिंग कश्मीर के सांभा सेक्टर में हुआ वहां से जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो उन्हें गुरेज़ सेक्टर में तैनाती मिली। अपने 11 साथियों के साथ पाकिस्तानी कब्जे में मौजूद पोस्ट को छुड़ाया। जिसमे तीन साथी जवान भी शहीद हुए थे। इस विजय पर उन्हें पदक से भी सम्मानित किया था। जय प्रकाश वर्तमान में बांग्लादेश भारत बॉर्डर पर तैनात देश की रक्षा कर रहे है। पीड़ित बीएसएफ जवान जय प्रकाश सिंह का कहना है कि जब भी छुट्टी पर आता हूँ इसी मामले को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहते है।



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