भारत में बना कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण, आत्मनिर्भर भारत के लिए बनेगा एक मिसाल, वैज्ञानिकों का है भरोसा, पढ़े पूरी खबर:

भारत में कोरोना वैक्सीन का निर्माण कर लिया गया है परंतु अभी इसका मानव परीक्षण बाकी है आपको बता दें कि कोरूणा के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देश के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस लिए स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मील का पत्थर है। रेणु स्वरूप ने कहा किस्वदेशी रूप से विकसित कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू करने के लिए ज़ाइडस कैडिला का कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काफी महत्वपूर्ण है।

जाइडस कैडिला(Zydus Cadila) ने बुधवार को बताया था कि उसने अपनी कोरोना वैक्सीन के मानव परीक्षण की शुरुआत कर दी है। इसके तहत मानव ट्रायल के फेज-1 और फेज-2 को शुरू कर दिया गया है। प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन ZyCoV-D को जाइडस कैडिला(Zydus Cadila)द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।

ZyCoV-D को राष्ट्रीय बायोपार्मा मिशन के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित किया गया है।

डीबीटी सचिव ने एक बयान में कहा कि यह देश में मनुष्यों में फैलने वाले कोरोना वायरस के लिए पहली स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है। स्वरूप ने कहा कि यह देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी एक बड़ी छलांग है।उन्होंने कहा कि जाइडस कैडिला(Zydus Cadila) का स्वदेशी रूप से विकसित कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू होना आत्मनिर्भर भारत के लिए एक मील का पत्थर है। हम उम्मीद करते हैं कि कोरोना वैक्सीन मानव ट्रायल में प्री-क्लीनिकल ट्रायल की ही तरह अच्छे परिणाम दे। प्री-क्लीनिकल ट्रायल में इस वैक्सीन को सुरक्षित, इम्युनोजेनिक और योग्य पाया गया था।

बायोटेक्नोलॉजी विभाग की ओर से बयान में कहा गया है कि ट्रायल के फेज 1 और 2 खुराक में बहु-केंद्रित शोध किया जाएगा। इसमें वैक्सीन की सुरक्षा, सहनशीलता और प्रतिरोधी क्षमता का आकलन किया जाएगा। ZyCoV-D और COVAXIN, जो इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च(ICMR) के सहयोग से Bharat Biotech द्वारा विकसित किए गया है। देश में फिलहाल केवल दो वैक्सीन हैं, जिनके मानव परीक्षण के लिए ड्रग रेग्युलेटरी बॉडी से मंजूरी मिली है।

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