संजीवनी ग्राम्य वाटिका बन कर हुई तैयार, कोरोना संक्रमण से बचाव में भी होगी कारगर

लखीमपुर-खीरी. मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के विकास खंड पसगवां परिसर में ‘संजीवनी ग्राम्य वाटिका तैयार हुई। इनमें तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, मुलेठी आदि दुर्लभ किस्म के औषधीय पौधों, फलदार व सुगंधित फूलों वाले पौधों को संरक्षित किया जाएगा। इससे पर्यावरण सरंक्षण में मदद तो मिलेगी ही, यह पौधे कोरोना के संक्रमण से बचाव में भी कारगर साबित होंगे। विकास खंड पसगवां की ग्राम पंचायतों में जल्द ही संजीवनी वाटिका स्थापित की जाएंगी जो परदेश से लौटे कामगारों के लिए रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेंगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरुआत विकास खंड पसगवां परिसर से की गई है।

यहां पर शुरू हुआ कार्य

खंड विकास अधिकारी अमित सिंह की पहल पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत देवेंद्र कुमार, जेई आरईडी प्रदीप वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी रोहित कुमार, ग्राम प्रधान राहुल गुप्ता व रोजगार सेवक सोनी गुप्ता की देखरेख में ग्राम पंचायत पसगवां द्वारा ब्लॉक परिषर में मॉडल संजीवनी वाटिका स्थापित कर दी गयी है। विकास खंड परिसर के बाद क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों व परिषदीय विद्यालयों को चयनित कर वाटिका स्थापित करायी जाएगी। वाटिका को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित विद्यालयों के अध्यापकों व ग्राम प्रधान की होगी।

मनरेगा श्रमिकों को भी मिलेगा रोजगार

संजीवनी ग्राम्य वाटिका का कार्य मनरेगा से कराया जाएगा। इसमें मिट्टी का कार्य, पौधारोपण, वाल पेंटिंग व बाउंड्री का निर्माण शामिल है। इसमें बाहर से आए कुशल कामगारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिए जाएंगे।

वाटिका में होंगे ये पौधे

तुलसी, एलोवेरा, जरंकुश, मुलेठी, गिलोय, नींबू, इलायची, करीपत्ता (मीठी नीम), हल्दी, अदरख, पुदीना, लेवेंडर, अश्वगंधा, पत्थरचट्टा, खस, हरसिंगार, स्टीविया, मेंथी, गेंदा, अजवाइन, हींग, मेहंदी, पिपरमिंट, सहजन, पोस, गुड़हल, सिवनीबू, कार्डिलान्स, छुईमुई, नीम, नागफनी, अदरक, मोरपंख व पोम आदि के पौधे रोपित किए गए हैं।

बीमारियों से बचाव में कारगर होंगे औषधीय पौधे

बीडीओ पसगवां अमित सिंह ने बताया कि हर तरह की बीमारियों से बचाव में यह औषधीय पौधे कारगर होंगे। सेहत सुधारने में भी इनका उपयोग किया जा सकेगा। वाटिका की आवोहवा से ग्रामीणों की सेहत भी सुधरेगी तथा लोग औषधीय गुणों से युक्त इन पौधों को संरक्षित करने के लिए जागरूक होंगे। आयुष चिकित्सा पद्धति के आधार पर आवश्यकतानुसार इनका उपयोग भी कर सकेंगे।



Advertisement