1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रामभक्त इरफान, बोले- आज मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी का दिन

केपी त्रिपाठी/मेरठ. ''आगे कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई'' रामायण की यह चौपाई कहते हुए वह तर्क के साथ बोले “मुस्लिम राम भक्त क्यों नहीं हो सकते हैं? फिर कबीर को क्या कहोगे? रहीम को क्या कहोगे? सब हो सकते हैं राम भक्त। मेरठ के गांव रार्धना निवासी इरफान अहमद 1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े तो आज तक वह राम की अराधना करते हैं। वह रोजे रखते हैं तो दशहरे पर भगवान राम की पूजा करते हैं। रामनवमी के दिन घर पर हवन भी कराते हैं। हज कमेटी के सदस्य और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कहते हैं कि धर्म को बांटने वाले इसी धरती पर हैं। मरने के बाद कौन कहां जन्म लेता है ये तो किसी को पता नहीं होता। मोहम्मद इरफान कहते हैं कि आखिर किस-किस से कहूं कि मुझे अभी तक कोई मुसलमान नहीं मिला, जिसने मेरी राम भक्ति का विरोध किया हो।

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उन्होंने बताया कि वह दूर-दूर गए, खांटी मुस्लिम मोहल्लों में भी गए। बड़े उलेमाओं से लेकर आम मुसलिम ने बस मेरी तारीफ ही की। उन्होंने इसे जारी रखने की सलाह दी। फिर विवाद क्यों, झगड़ा किस बात का। अगर एक-दूसरे की मान्यताओं को खुलकर मान दें तो ‘पत्थर और खंजर’ वाले चंद लोग रावण की तरह नष्ट हो जाएंगे।
मुस्लिम और हिंदू धर्म में पूरी आस्था रखने वाले इरफान आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि ये देश की 130 करोड़ जनता से जुड़ा मसला था, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ निश्चय से पूरा हो पाया है।

मोहम्मद इरफान कहते हैं कि वे 1990 से लगातार राम मंदिर आंदोलन में भागीदारी करते आ रहे हैं। आज उन्हें भी बहुत खुशी हुई है। आज का दिन सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही यादगार दिन है।

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