कोरोना काल में शिक्षा की मुख्यधारा से अलग हुए दिव्यांगजन, आप भी सोचने पर हो जाएंगे मजबूर

मेरठ। कोरोना महामारी ने वैसे तो सभी लोगो को प्रभावित किया है लेकिन दिव्यांगजन पर इसका विशेष प्रभाव पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया मे कोरोना वायरस की सबसे अधिक मार विश्च में एक अरब विकलांग लोगों पर पड़ी है। अधिकांश विकलांगजन पहले से ही ग़रीबी, उपेक्षा, हिंसा, उत्पीड़न जैसी असमानताओं का सामना कर रहे थे। कोरोना महामारी ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। यह कहना है स्पेशल एजुकेटर हैं तथा इंटरनेशनल वेल्फेयर ट्रस्ट से जुड़े फरहत अली का। जिन्होंने एक कार्यक्रम में यह बात कही।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में लगभग 15 प्रतिशत लोग दिव्यांग हैं और इनमे से 46 प्रतिशत 60 वर्ष से ऊपर अर्थात् वरिष्ठ नागरिक हैं। महामारी ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे इन दिव्यांग वरिष्ठ नागरिको को अधिक जोखिम मे डाल दिया है। उनके समक्ष न केवल आर्थिक संकट है बल्कि स्वास्थ्य की देखभाल, साफ़- सफाई और सोशल डिस्टेंसिग रखने में भी कठिनाइयाँ आ रही हैं। भारतीय सांख्यिकी मंत्रालय के वर्ष 2018 मे कराये गये एक सर्वे के अनुसार इस समय देश में लगभग 2.2 करोड़ व्यक्ति विकलांग हैं और इनकी 70 प्रतिशत संख्या ग्रामीण इलाक़ों मे निवास करती है।

दिव्यांग लोगों के लिए काम करने वाली संस्थाएं भी संकट में

उन्होंने कहा कि महामारी के कारण दिव्यांग व्यक्तियों के लिये काम करने वाली संस्थाएं भी वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। कोरोना संकट अभी समाप्त होता प्रतीत नहीं हो रहा है। संक्रमण प्रभावित व्यक्तियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और आने वाले समय मे विशेष रूप से दिव्यांगजनों को अधिक कठिन दौर से गुज़रना पड़ सकता है।

प्रभावित हो रही दिव्यांग बच्चों की शिक्षा

कोरोना महामारी में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यदि समय रहते विभिन्न स्तरों पर प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसके दुष्परिणाम अगले कई बरसों तक भुगतने पड़ सकते हैं। लॉक डाउन के कारण स्कूल बंद हैं। अब स्कूलों ने आनलाइन क्लास शुरु की है किंतु अधिकांश विकलांग बच्चे सीमित संसाधनों तथा आर्थिक तंगी के कारण इस सुविधा का लाभ नही उठा पा रहे हैं। आनलाइन शिक्षा के लिए जिन संसाधनों की आवश्यकता है उनका नितांत अभाव है।

स्कूल खुलने के बाद भी ग़रीब परिवारों के बहुत से बच्चों के लिए अब ये मुश्किल होगा कि वह शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ सकें। कोरोना महामारी से पूर्व भी विकलांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा का वातावरण तैयार करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। अब यह कार्य और भी मुश्किल हो सकता है। विकलांगता से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवार के लिए अतिरिक्त संसाधनों के जुटाने की आवश्यकता है ताकि वह महामारी के कारण बदलती हुई विषम परिस्थितियों मे स्वयं को ढाल सकें।



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