हफ्तेभर में शुरू हो जाएगा राम मंदिर नींव की खुदाई का काम, हुआ बड़ा ऐलान

अयोध्या. राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए नींव खुदाई का काम हफ्तेभर में शुरू हो जाएगा। एलएंडटी कंपनी की कई मशीनें जन्मभूमि परिसर में पहुंच चुकी हैं। राम मंदिर का प्रस्तावित नक्शा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या विकास प्राधिकरण को सौंपा जा चुका है। नक्शे में मंदिर निर्माण के पांच एकड़ क्षेत्र के साथ पूरे 70 एकड़ क्षेत्र का लेआउट शामिल है। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि विकास शुल्क की अग्रिम राशि 65 हजार रुपए नक्शे के साथ प्राधिकरण में जमा कर दी गई है। प्राधिकरण कुल विकास और अन्य शुल्क का आकलन करके जो भी सूचना देगा उस हिसाब से बाकी धनराशि भी जमा कर दी जाएगी। अनिल मिश्रा के मुताबिक एलएंड टी कंपनी की कई मशीनें मंदिर परिसर में पहुंच चुकी हैं। कई बड़ी मशीनें अयोध्या के रास्ते में हैं जो 1 सितम्बर तक पहुंच जाएंगी। पूरी उम्मीद है कि राम मंदिर का नक्शा मिलते ही सितम्बर के पहले हफ्ते में राम मंदिर की नींव की खुदाई का काम निर्माण शुरू हो जाएगा।

 

2 सितंबर को होगी बैठक

वहीं प्रधिकरण के उपाध्यक्ष नीरज शुक्ला ने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम, अग्निशमन, नजूल समेत दूसरी आपत्तियां प्रस्तावित नक्शे के साथ जमा की गई हैं। सभी दस्तावेजों की जांच कर ली जाएगी। 2 सितंबर को कमिश्नर एमपी अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक होगी। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक विकास शुल्क बोर्ड की मंजूरी के बाद करीब ढाई करोड़ रुपए प्राधिकरण के खजाने में ट्रस्ट को जमा करना होगा। नीरज शुक्ला ने बताया कि राम मंदिर का मूल नक्शा बड़ी मेज के आकार का है। इससे साथ कई छोटे-छोटे नक्शे भी हैं। इनमें जमीन पर प्रस्तावित योजनाओें को दर्शाया गया है। पांच एकड़ क्षेत्र में बनने वाले राम मंदिर भवन के नक्शे में निर्माण की लंबाई-चौड़ाई-ऊंचाई दी गई है। बाकी इलाके की प्रस्तावित परियोजनाओं पर जब काम शुरू करना होगा तो इसके नक्शे का विकास शुल्क आदि जमा करके स्वीकृत करवाया जाएगा। इसीलिए मंदिर परिसर के 70 एकड़ क्षेत्र के लेआउट नक्शे का भी विकास शुल्क जमा किया गया है।

 

प्राचीन मंदिरों को गिराने का काम जारी

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के पांच एकड़ क्षेत्र में सीता रसोई, जन्म स्थान, साक्षी गोपाल मंदिर, कोहबर भवन और मानस भवन के आधे हिस्से को गिराया जा रहा है। अब तक जन्म स्थान, सीता रसोई मंदिर को गिराया जा चुका है, बाकी को भी जल्द गिरा दिया जाएगा। इनमें कई मंदिर 250 साल पुराने हैं पर इनकी हालत बेहद जर्जर थी। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक जिन प्राचीन मंदिरों को गिराया गया है, उनके विग्रहों को सुरक्षित रखवा दिया गया है। मंदिर परिसर में बनने वाले अन्य छोटे मंदिरों में इन विग्रहों को दोबारा स्थापित किया जाएगा।

 



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