हेपेटाइटिस में न करें लापरवाही, लीवर कैंसर सहित कई बीमारियों के हो सकते हैं शिकार

बाराबंकी. हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण अगर सही वक्त से मालूम हो जाए और उसका उपचार हो जाए तब तो सब ठीक, नहीं तो इसमें आगे चलकर बच्चों से लेकर बड़ो को लीवर कैंसर, पेट सम्बन्धी बीमारी होने का खतरा बन जाता है। हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता के लिए जन्म से लेकर साढ़े तीन साल तक उम्र के बच्चों को टीका लगाया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी से पहले भी इसकी जांच होती है। कोविड 19 प्रटोकाल के तहत स्थानीय जनपद में 7289 बच्चो को हेपेटाइटिस तो 17670 पेंटा वैलेट टीकाकरण किया गया।

जिला प्रतिक्षण अधिकारी डाक्टर राजीव सिंह ने बताया कि महिला चिकित्सालय में स्थित मातृ शिशु यूनिट में प्रसव के समय जांच के साथ ही बच्चों को टीके भी लगाये जाते है। प्रसव के समय गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस जांच इसी वजह से कराई जाती है, जिससे कि जांच में पीलिया, लीवर सूजन सहित अन्य बीमारियों के बारे में जानकारी मिल सके और होने वाले बच्चे पर इसका कोई असर न पड़े। उन्होने बताया कि जांच को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक भी किया जाता है।

चार महीने में 7289 बच्चों को लगे टीके

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 1 अप्रैल 2020 से जुलाई महीने तक 7289 बच्चों को हेपेटाइटिस के टीके लगाए जा चुके है। इसके अलावा डिप्थीरिया, परथोसिस, टिटनेस, हेपेटाइटिस समेत पांच टीकों के समूह वाला पेंटा वैलेंट भी 17670 बच्चों को लगाया जा चुका है।

जन्म से साढ़े तीन साल तक लग सकते हैं टीके

डाक्टर राजीव के अनुसार जन्म से 24 घंटे के भीतर किसी बच्चे को हेपेटाइटिस का टीका लगवाना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश नहीं लग पा रहा है तो बच्चे को पेंटावेलेंट (पांच टीके एक साथ) का डोज डेढ़, ढाई और साढ़े तीन साल पर लगाया जाता हैं। समय से टीके लगने से किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है।


हेपेटाइटिस के लक्षण

1. आंखों पर पीलापन आना

2. अधिक से अधिक थकान लगना

3. उल्टी और मिचली आना

4. भूख कम लगना

5. पेट के उपरी हिस्से में दर्द और सूजन आना


ऐसे करें बचाव

करेले के पत्ते के रस का सेवन, मकोय का रस, गन्ने का रस और गिलोय के रस का सेवन फायदेमंद। समय पर टीकाकरण जरूरी। बीमारी का पता चलते ही जांच शुरू कर देना।



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