वाराणसी में मेडिकल अफसरों के सामूहकि इस्तीफे के बाद, अधिकारियों का दखल घटाया गया, सभी काम पर लौटे

वाराणसी. यूपी के वाराणसी में डिप्टी सीएमओ की मौत के बाद 28 प्रभारी चिकित्साधिकारियों द्वारा सामूहिक इस्तीफे से बनारस से लेकर लखनऊ तक हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में इन चिकित्साधिकारियों को मनाने की कवायद शुरू हो गई। चिकित्साधिकारियों ने अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। प्रभारी चिकित्साधिकारियों के इस्तीफे के बाद व्यवस्था बदले जाने और स्वास्थ्य विभाग में पशासनिक अधिकारियों का दखल घटने की बात कही जा रही है।

 

नई व्यवस्था के तहत अब प्रशासनिक अधिकारी सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को निर्देश नहीं देंगे। उनका काम सीएमओ और ए सीएमओ के साथ समन्वाय स्थापित करने का होगा। नाराज मेडिकल आफिसरों के इस्तीफे के बाद डीएम कौशल राज शर्मा ने नई व्यवस्था जारी कर दी है। इस व्यवस्था में साफ किया गया है कि सीएचसी और पीएचसी के प्रभारियों को सीएमओ के अलावा किसी अधिकारी द्वारा सीधे निर्देश नहीं जारी किया जाएगा।

वाराणसी में 28 मेडकिल आफिसर्स ने दिया सामूहकि इस्तीफा, अफसरों पर लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप

 

क्या है नई व्यवस्था

  • स्वास्थ्य विभाग की सहायता के लिये लगाए गए अन्य विभागों के अधिकारी सीएमओ और एडिशनल सीएमओ के साथ समन्वय बनाएंगे। पीएचसी और सीएचसी के कार्य का दायित्व और नियंत्रण केवल सीएमओ का रहेगा। आगे इनकी बैठकें करने और निर्देश जारी करने की जिम्मेदारी सीएमओ ही निभाएंगे। अन्य विभागों के अधिकारियों का दायित्व एसीएमओ और उनकी टीम को सपोर्ट देना व डाटा फीडिंग, प्लानिंग आदि करने में मदद का होगा।
  • सीएमओ के अलावा सीएचसी और पीएचसी प्रभारियों को कोई अधिकारी सीधे निदेर्श नहीं जारी करेंगे। एडिशनल सीएमओ या सीएमओ को इसके लिये अधिकृत किया गया है।
  • कांटेक्ट ट्रेसिंग का काम अध्यापकों की 102 टीम करेगी। इससे प्रभारी चिकित्साधिकारियों को कांटेक्ट ट्रेसिंग आसानी होगी।
  • लैब टेक्नीशियन की 30 नई टीम बनाकर सैम्पल की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। पहले हर पीएचसी पर सिर्फ एक टीम ही कार्यरत थी, जिससे सैम्पलिंग का काम समय पर पूरा होने में परेशानी आ रही थी।
  • डाटा फीडिंग के काम का बोझ कम करने की कोशिश की गई है। डाटा फीडिंग के लिये शहर के एेसे 15 स्वास्थ्य केन्द्र जहां काम का बोझा ज्यादा है व जहां ज्यादा पाजिटिव केस आए हैं, उन्हें अतिरिक्त डाटा इंट्री आपरेटर कांट्रेक्ट पर रखकर उपलब्ध कराए गए हैं। यही नहीं सर्विलांस से ढूंढे गए लोगों के तीव्र इलाज के लिये डाक्टर भी बढ़ाए जाने का जिक्र है।
  • नई व्यवस्था में कहा गया है कि ये सारी व्यवस्थाएं पीएचसी प्रभारियों को रोजाना जल्दी काम पूरा करने और उनपर काम का बोझ कम करने के लिये की गई हैं, ताकि उनके कार्य की प्रगति बढ़े। टीमों से कांटेक्ट ट्रेसिंग सैम्पलिंग, डाटा फीडिंग और इलाज कराने के काम का पर्यवेक्षण संबंधित सीएमओ करेंगे। दूसरे विभागों के अधिकारियों का सिर्फ सपोर्टिंग रोल होगा। सीएमओ द्वारा इस कार्य आवंटन का आदेश पूर्व में ही जारी किया जा चुका है।


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