एक दिन के लिए आजाद हुआ था बेवर, क्रांतिकारियों ने थाने पर फहराया था तिरंगा

आगरा. देश की आजादी को लेकर कई किस्से, कई कहानियां हैं। प्रदेश में कई ऐसी इमारतें, गली, चौक हैं जिनका अंग्रेजों के जमाने से महत्व रहा है। इसी तरह बेवर जगह का भी आजादी की लड़ाई में अपना महत्व रहा है। यहां हर साल 14 अगस्त को बेवर में आजादी के दीवाने तीनों क्रांतिकारियों को याद किया जाता है। बेवर के क्रांतिकारियों ने 14 अगस्त 1942 को एक दिन के लिए बेवर को आजाद कराया था। क्रांतिकारियों ने अंग्रेज पुलिस को खदेड़कर नारेबाजी करके थाने पर तिरंगा फहराया था। 15 अगस्त 1942 को अंग्रेज पुलिस और सेना द्वारा क्रांतिकारियों पर की गई गोलीबारी में बेवर के एक छात्र सहित तीन क्रांतिकारी शहीद हुए थे।

आजादी से पांच साल पहले अगस्त 1942 की राष्ट्रीय क्रांति में महात्मा गांधी द्वारा करो या मरो और अंग्रेजो भारत छोड़ो के आह्वान पर बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ी थी।भारत को अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ाने के लिए भारतीयों ने खून पसीना एक कर दिया था। 14 अगस्त 1942 को बेवर थाने पर कब्जा करके अंग्रेज पुलिस को खदेड़कर थाने पर तिरंगा फहरा दिया। एक दिन के लिए बेवर अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ। अगले दिन 15 अगस्त 1942 को बाहर से आई अंग्रेज पुलिस और सेना ने बेवर थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की। इसलिए तब से हर साल 14 अगस्त को बेवर में आजादी के दीवाने तीनों क्रांतिकारियों को हर मौके पर याद किया जाता है।

शहीदों की याद में लगता है मेला

बेवर में शहीदों की याद में मेले का आयोजन किया जाता है। शहीदों के बलिदान स्थल पर वर्ष 1948 से 15 अगस्त को बलिदान दिवस मनाने का सिलसिला शुरू हुआ। 1986 में 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन से मेले की शुरुआत हुई थी।

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