मुहर्रम के जुलूस और मजलिस को लेकर जारी की गई एडवाइजरी

मेरठ. कोविड-19 संक्रमण काल में तीज-त्यौहारों पर सदियों से चलती आ रही परंपराएं भी खत्म हो रही हैं। मोहर्रम के दौरान बड़े-बड़े ताजिए और जुलूस निकाले जाते थे। देर रात तक मजलिशों के दौर चलते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते वह सब इस बार नहीं होगा यानी मुहर्रम पर सदियों से चलती आ रही परंपरा पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। मेरठ मुहर्रम कमेटी के अली हैदर रिजवी ने बताया कि 'ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड' ने मुहर्रम पर जुलूस और मजलिस को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

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मनसबिया के वाइस प्रेसीडेंट मोहम्मद वाकर जैदी ने बताया कि मुहर्रम पर जुलूस और मजलिस को लेकर एडवाइजरी जारी की जाएगी और उसके अनुसार ही मनाया जाएगा। इसमें केंद्र व प्रदेश सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए मुहर्रम मनाने की अपील की जाएगी। उन्होंने बताया कि सुना जा रहा है कि लखनऊ में इस बारे में बैठक हुई है और उलमा ने बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों से घरों में रहकर ऑनलाइन मजलिस व जुलूस में शामिल होने की अपील की है।

उन्होंने बताया की देशभर के उलमा से राय मशविरा करने के बाद मजलिस व जुलूस को लेकर अलग-अलग एडवाइजरी जारी की गई हैं। एडवाइजरी में मजलिस को समय पर शुरू करने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया गया है। साथ ही मजलिस में आने वाले लोगों को मुफ्त में मास्क वितरित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से मजलिस में भीड़ न लगाने की अपील की गई है। जैदी ने बताया कि शिया कौम पढ़ी-लिखी है। कोई भी काम ऐसा नहीं करेंगे, जिससे कि बीमारी फैले या संक्रमण को बढ़ावा मिले। इसलिए जो गाइडलाइन तय की जाएगी उसके अनुसार ही मुहर्रम मनाया जाएगा। मजिलस स्थल में बैठने की जगह अधिकांश लोग अपने घर पर टीवी या मोबाइल पर ऑनलाइन मजलिस में शामिल हो सकते हैं। मजलिसों का लाइव प्रसारण किया जाएगा।

इसके साथ ही मजलिस में आने वाले लोगों को मुफ्त में मास्क वितरित किए जाएंगे। उन्होंने लोगों से मजलिस में भीड़ न लगाने की अपील की है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जुलूस का आयोजन करने वाली तंजीम केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन कर प्रशासन की अनुमति से मुहर्रम के जुलूस निकालें। जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद जुलूस में भीड़ न जुटने दी जाए। लोग जुलूस में कम देर के लिए शामिल हों, ताकि ज्यादा लोगों को मौका मिले।

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