कोरोना के मद्देनजर छाते-छतरी और रेनकोट कारोबार पर मंदी का संकट

सुलतानपुर. हर साल बरसात के मौसम में जिले भर में करोड़ों रुपए का व्यवसाय करने वाले छाता-छतरी और रेनकोट के व्यवसायियों की इस बारिश के मौसम में आधा बरसात का मौसम बीत जाने के बाद भी बोहनी तक नहीं हुई। बोहनी की भी बात छोड़िये ,दुकानों के शटर तक नहीं उठे हैं। कोरोना वायरस ने छाता -छतरी बेचने वालों को पैदल कर दिया है।

हर साल बरसात का मौसम आने की आहट से ही रंग- बिरंगी छाता-छतरी और रेनकोट दुकानों के सामने सज जाते थे और छाता -छतरी और रेनकोट खरीदने वालों की भीड़ लगने लगती थी। खरीददारों में भी ज्यादातर स्कूली बच्चे और महिलाएं ही होती थी, लेकिन बारिश के इस मौसम में रंग- बिरंगे छाते-छतरी लगाकर बारिश से न तो कोई बचने का जतन कर रहा है और न ही कोई रेनकोट पहनकर बारिश में टहलता नजर आ रहा है।

स्कूल-कालेज बंद होने से छाता कारोबार बंद

जिले में कोरोना वायरस के कारण स्कूल-कालेज और सरकारी दफ्तरों में लटक रहे तालों की वजह से जिले में छाता-छतरी और रेनकोट का कारोबार बेपटरी हो गया। छाता-छतरी के खरीददार ज्यादातर स्कूली बच्चे और महिलाएं ही होती हैं और जब स्कूलों और कॉलेजों में ताला लगा हुआ है और बच्चे महिलाएं घर में कैद हैं तो ऐसे में छाता-छतरी व्यवसाय धड़ाम हो गया है और इसके कारोबारी भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।

छाता कारोबारी विजय कसौधन बताते हैं कि छाता कारोबार ने इससे पहले इतना बड़ा झटका कभी नहीं दिया था क, जितना बड़ा झटका इस बार लगा। इस लगे झटके से छाता कारोबारी बर्बाद होने की कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि जिले भर में छाता-छतरी कारोबारियों की संख्या करीब 5 सौ है, लेकिन इस सीजन में कोरोना ने सबको चौपट कर दिया है।



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