रैपिड रेल प्रोजेक्ट को 3750 करोड रुपये से मिलेगी रफ्तार, 180 KM की स्पीड से कर सकेंगे सफर

मेरठ। पेरिस, लंदन, मैड्रिड, बर्लिन, टोक्यो, बीजिंग आदि जगहों पर चल रही रेपिड रेल अब मेरठ—दिल्ली रूट पर भी काम पूरा होने के बाद हवा से बात करेगी। जिसके कारण मेरठ से दिल्ली की यात्रा 1 घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। काम पूरा करने के लिए 3750 करोड रूपये का लोन रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट के पूरा करने को मिला है।

राजधानी दिल्ली से मेरठ के बीच यातायात में लोगों को भीड़ और प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। एनएच—58 पर दिल्ली से लेकर मेरठ के परतापुर तक काम में तेजी आ चुकी है। कई जगह तो पिलर भी बनकर तैयार हो चुके हैं। यह प्रोजेक्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक नई क्रांति लेकर आएगा। लोग दो शहरों की दूरी 1 घंटे से भी कम समय मे पूरी कर सकेंगे।

योजना में होंगे तीन कॉरिडोर

इस योजना में 3 कॉरिडोर होंगे। ये कॉरिडोर हैं- दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर और दिल्ली-पानीपत है। पहले कॉरिडोर के अंतर्गत गाजियाबाद से काम की शुरुआत हुई है। बता दें कि राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम हाई स्‍पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। दिल्‍ली से गाजियाबाद होते हुए मेरठ जाने वाले इस कॉरिडोर में दौड़ने वाली ट्रेनों की रफ्तार करीब 180 किमी प्रति घंटा होगी। इस परियोजना का एमडी विनय कुमार सिंह को बनाया गया है।

180 किमी प्रतिघंटे तक होगी स्पीड

देश में लागू होने वाली अपने किस्म की यह पहली परियोजना है। अभी तक मेट्रो के जरिए लोग शहर के अंदर सफर करते थे। इससे अलग रैपिड रेल अर्ध शहरी और शहरी केंद्रों को जोड़ेगा। मेट्रो और भारतीय रेल से बहुत अलग इस ट्रेन में बहुत अलग खूबियां हैं। यह ट्रेन 180 किलोमीटर की अधिकतम गति से चल सकती है और प्रति घंटा 160 किलोमीटर ये संचालित होगी। इस ट्रेन की औसत गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और यह 60 मिनट से भी कम समय में दिल्ली से मेरठ की दूरी तय करेगी। 9 कोच वाली यह ट्रेन विपरीत मौसम में भी चलेगी।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ा जाएगा कॉरिडोर

रेपिड रेल से लोगों को वर्तमान साधनों की तुलना में समय की बड़ी बचत होगी। इस ट्रेन से दिल्ली और आसपास के लोगों को अब एनसीआर से दूर बसने और काम करने में आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। इस योजना में सबसे ज्यादा ध्यान मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन सिस्टम पर दिया जा रहा है। इस सिस्टम के जरिये इस योजना को मेट्रो, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों से भी जोड़ा जाएगा ताकि लोगों को इस ट्रेन में सफर करने के लिए सार्वजनिक यातायात के साधनों से दूर न जाना पड़े।



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