राम मंदिर के निर्माण से पहले अयोध्या में लगेंगी भगवान राम की 7 मूर्तियां, इस तरह आएंगी नजर

अयोध्या. भव्य राम मंदिर के लिए हुए भूमि पूजन के बाद अब मंदिर निर्माण की शुरुआत के लिए सारी औपचारिकताएं जोर-शोर से चल रही हैं। तो वहीं दूसरी तरफ मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या में भगवान राम की सात बड़ी मूर्तियां लगाए जाने की भी तैयारी है। ये मूर्तियां ऐसी जगहों पर लगाई जाएंगी, जहां से ज्यादा से ज्यादा पर्यटक और श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें और आकर्षित हो सकें। भगवान राम की ये मूर्तियां उनके अलग-अलग रूप दर्शाएंगी। इन मूर्तियों में रामलला के वनवास, घनुषधारी, राजा राम, शिकार करते हुये, उपदेशक, विचारक जैसे रूप दिखेंगे।

वहीं राम मंदिर निर्माण के लिए 70 एकड़ भूभाग का लेआउट नक्शा श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने अयोध्या विकास प्राधिकरण को भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक नए नक्शे में कुछ बड़े हिस्सों के साथ-साथ छोटे-छोटे हिस्से भी हैं। इन हिस्सों में राम मंदिर से जुड़ी हुई तमाम चीजों का निर्माण होना है। अयोध्या मे राम मंदिर के लिए नींव की खुदाई का काम सितंबर के पहले हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। राम मंदिर के निर्माण से पहले अयोध्या को राममय बनाने की भी तैयारी है।

राम मंदिर के नक्शे पर 2 सितंबर को बोर्ड बैठक

रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के प्रस्तावित मंदिर सहित पूरे 70 एकड़ परिसर के ले-आउट के मानचित्र की स्वीकृति अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण बोर्ड (एएफडीए) के माध्यम से होगी। क्योंकि 25 हजार वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल पर नक्शे की स्वीकृति देने का अधिकार उपाध्यक्ष को है लेकिन इससे ऊपर के क्षेत्रफल में नक्शे की स्वीकृति का अधिकार बोर्ड में निहित है। इसी के चलते दो सितम्बर को बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। वित्त एवं लेखाधिकारी व कार्यकारी सचिव पीके सिंह ने बताया कि मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल की अध्यक्षता में 2 सितंबर को विकास प्राधिकरण कार्यालय में ही होगी। बोर्ड की हरी झंडी मिलने के बाद नक्शे से सम्बन्धित शुल्कों की गणना होगी।

विकास शुल्क के अधिकतम छूट पर फैसला

दरअसल ट्रस्ट ने पूरे 70 एकड़ का नक्शा दाखिल किया है। ऐसी स्थिति में सम्पूर्ण क्षेत्रफल पर विकास शुल्क लिया जाएगा जो कि केवल एक बार ही देय होगा भले निर्माण कभी भी कराया जाए। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक चैरिटेबल संस्था के रूप में आयकर विभाग में पंजीकृत है। ऐसी स्थिति में संस्था की ओर से कराए जा रहे ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण में आरोपित होने वाले विकास शुल्क में अधिकतम 65 प्रतिशत छूट भी प्रदान दिए जाने का प्रावधान है। अब प्राधिकरण बोर्ड संस्था को कितने प्रतिशत छूट देने का फैसला करता है। यह बोर्ड के निर्णय के बाद ही पता चल सकेगा।

बोर्ड में ही हो जाएगी सबकी अनापत्ति

एएफडीए की ओर से किसी भवन का नक्शा स्वीकृत कराने से पहले जिन विभागों के अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत होती है, वह सभी विभाग के अधिकारी प्राधिकरण बोर्ड के पदेन सदस्य हैं। ऐसी स्थिति में विकास प्राधिकरण बोर्ड की ओर से नक्शा स्वीकृति के साथ ही सम्बन्धित विभागों के अनापत्ति खुद हो जाएगी। हालांकि एएसआई का मामला केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के अन्तर्गत विधिक प्रक्रिया में है।



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