महाभारत कालीन पांडव टीले से मिला प्राचीन मृदभांडों का जखीरा

मेरठ. हस्तिनापुर कौरव-पांडों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। आज भी हस्तिनापुर और आसपास के इलाके में ऐसे अवशेष मिलते हैं, जिनसे महाभारत काल के संबंध हैं। मेरठ और पश्चिम उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कौरव और पांडवों से जुड़े प्राचीन चिन्ह और अवशेष मिलते रहते हैं। गत शुक्रवार को भी हस्तिनापुर स्थित पांडव टीले से प्राचीन मृदभांडों के अवशेष मिले हैं। इसके आसपास मनुष्य की हड्डियों के अवशेष भी पड़े हुए थे।

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शोध के दौरान शोधकर्ता प्रियंक भारती को रघुनाथ महल के पास ये अवशेष मिले हैं। आला अधिकारियों ने स्थान और पॉटरी के फोटो भेजने के निर्देश दिए हैं। पुरातत्व विभाग का मेरठ में नया सर्किल बनने से पहले ही हस्तिनापुर की पुरातत्व साइट पांडव टीला पर लगातार कार्य जारी है। पांडव टीले के समीप बने कार्यालय का भी कायाकल्प किया गया है।

पांडव टीले की चारदीवारी की मरम्मत और सफाई भी की जा रही है। उम्मीद है कि पांडव टीले के पास जल्द ही बड़ी सौगात मिलने वाली है। शुक्रवार को नेचुरल साइंसेस ट्रस्ट के चेयरमैन व शोभित विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती शोध के लिए पांडव टीला पहुंचे। रघुनाथ महल के समीप एक सुरंगनुमा स्थान नजर आया। बाहरी दीवारों पर कई मृदभांड दिखे। इनको उन्होंने एएसआई कर्मी अरविंद राणा को सौंप दिया। पांडव टीले से मिले मृदभांडों के जखीरे से उच्चाधिकारी हैरत में हैं। शोध आगे बढ़ाने के लिए और जानकारी मांगी गई है।

सिनौली की तर्ज पर हो सकती है ब्यूरियल साइट

अब इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि यहां भी बागपत के सिनौली की तर्ज पर ही ब्यूरियल साइट मिल सकती है। प्रियंक भारती ने कहा कि अनेक कालों के अवशेष और मानव हड्डियां मिलने से यहां ब्यूरियल साइट हो सकती है। इस स्थान का अभी उत्खनन नहीं किया गया है।

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