इतने चरणों में संपन्न हो सकता है बिहार विधानसभा चुनाव, इसी हफ्ते हो सकता है तारीखों का ऐलान, चुनाव आयोग एक्शन में

बिहार विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई. एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार बिहार को लेकर बड़ी घोषणाएं कर रही है वहीँ दूसरी तरफ चुनाव आयोग की टीम भी बैठकें पर बैठकें कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा कर रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि इसी सप्ताह चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा. पिछले 2-3 चुनावों से बिहार में 6 से 7 चरणों में वोटिंग कराई जाती रही है. लेकिन इस बार परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं. इस बार बिहार के कई जिले बाढ़ के कहर से जूझ रहे हैं और कोरोना का कहर भी कम होने का नाम नहीं ले रहा. इसी को देखते हुए चुनाव आयोग जल्द से जल्द और कम चरणों में चुनाव संपन्न करा सकती है.

मंगलवार को चुनाव आयोग की टीम ने भागलपुर में 12 जिलों के डीएम और एसपी के साथ समीक्षा बैठक की. इस बैठक में भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई, खगड़िया, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के जिलाधिकारियों और एसपी और एसएसपी ने हिस्सा लिया. बैठकों को देख कर अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन जिलों में एक साथ चुनाव कराये जा सकते हैं.

भागलपुर के अलावा बोधगया में भी चुनाव आयोग की टीम ने  गया, जहानाबाद, अरवल, नवादा, औरंगाबाद, कैमूर और रोहतास के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की. इन जिलों में एक ही चरण में चुनाव कराये जा सकते हैं. इससे पहले सोमवार को चुनाव आयोग की टीम ने मुजफ्फरपुर में समीक्षा बैठक की. इस बैठक में उत्तर बिहार के जिलों मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर, पश्चिमी चंपाण, पूर्वी चंपारण, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिले की चुनाव तैयारियों की समीक्षा की गई. उत्तर बिहार में एक साथ चुनाव कराये जाने की संभावना है.

चुनाव आयोग की टीम ने पटना, बक्सर, सारण, भोजपुर, नालंदा, गोपालगंज और सीवान के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के साथ भी समीक्षा बैठक किया. इन जिलों में एकसाथ चुनाव हो सकते हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही कह दिया है कि कोरोना की वजह से हर बूथ पर 1000 मतदाताओं की सिमित संख्या रहेगी. इसलिए इस बार कुछ नए बूथ बनाये जायेंगे. बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा है. उससे पहले हर हाल में चुनाव संपन्न कराना है. चुनावों के दौरान ही नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा जैसे त्यौहार हैं. चुनाव आयोग की कोशिश है कि दिवाली और छठ पूजा से पहले ही वोटिंग की प्रक्रिया संपन्न करा ली जाए.



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