बुंदेलखंड एक्सप्रेस की खासियत जान दंग रह जाएंगे आप, देश का सबसे मॉर्डन रोड होगा यह

लखनऊ. चित्रकूट से इटावा तक बन रहा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पूरी तरह इको फ्रेंडली होगा। इसके निर्माण के दौरान पर्यावरण मानकों का ध्यान तो रखा ही जा रहा है। साथ ही चालू होने पर भी यह एक्सप्रेस पूरी तरह ग्रीनवेज से लैस होगा। सरकार 296 किलोमीटर के एक्सप्रेसवे के रास्ते 2.70 लाख पेड़ लगाने की योजना है। प्रदूषण रोकने के लिए इलेक्ट्रिक व सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए सीएनजी स्टेशन व इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे।

एक पेड़ काटने पर लगाए जाएंगे 3 पेड़

बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के लिए पर्यावरणीय गाइडलाइंस के हिसाब से इसका निर्माण कार्य जारी है। सबसे ज्यादा जोर पर्यावरण संरक्षण व जैव विविधता संरक्षण पर है एक पेड़ काटने पर नुकसान की भरपाई के लिए तीन पेड़ लगाने होंगे ताकि हरियाली बरकरार रहे। घने छायादार के साथ-साथ वायु प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण को रोकने वाले पेड़ लगेंगे। पूरी तरह में पूरी योजना में पर्यावरण मानकों के अमल पर निगरानी के लिए एनवायरमेंट मैनेजमेंट सेल करेगा।

इसके साथ ही बता दें कि इन दिनों एक्सप्रेसवे की निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके निर्माण में एक लाख मैट्रिक टन स्टील इस्तेमाल होगा 132 70 के एल डी किलो लीटर प्रतिदिन पानी का इस्तेमाल होगा सुरक्षा के कड़े मानक लागू होंगे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के दोनों किनारों दुर्घटना रोकने के लिए मेटल क्रश बीम लगेंगे।

इन नदियों से होकर गुजरेगा बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे

बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे चालू होने पर वायु प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण की खास निगरानी की जाएगी। हर छह महीने पर हवा में धूल की ध्वनि की मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके साथ ही ध्वनि अवरोधक लगेंगे। वन क्षेत्रों से गुजरने वाले क्षेत्रों पर यह खासतौर पर लगाया जाएगा। यह एक्सप्रेस वे केन श्यामा, चंदावल, बिरमा, यमुना, बेतवा, सेंगर नदियों से होते हुए गुजरेगा।



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