बाबरी विंध्वंस के आरोपी राम विलास वेदांती ने किया आत्मसमर्पण का एलान

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. अयोध्या में बाबरी विध्वंस केस में सीबीआई की विशेष अदालत 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। इसके पहले ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पूर्व सांसद डाॅ. राम विलास वेदांती ने आत्मसमर्पण करने का ऐलान किया है। उनका कहना है क कोर्ट अगर उन्हें उम्र कैद देती है या फांसी की सजा देती है तो भी उन्हें मंजूर है। उन्हाेंने कहा है कि वह कोर्ट पहुंचकर आत्मसमर्पण करेंगे। बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत कर रही है, जो 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। कोर्ट ने इस मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवानी समेत सभी आरोपियों को फैसले के दिन कोर्ट में मौजूद रहने को कहा है। इसके लिये कोर्ट की ओर से उन्हें नोटिस भी भेजा गया है। बता दें कि कोर्ट ने बीते एक सितंबर को ही सुनवाई पूरी कर ली है।

 

बाबरी विध्वंस केस के फैसले को लेकर आरोपी भाजपा के पूर्व सांसद डाॅक्टर राम विलास वेदांती ने पत्रिका से कहा है कि उन्होंने कोर्ट की पेशी के दैरान पूछे गए सवालों के जवाब दिये हैं। उन्होंने कोर्ट के सवााल के जवाब में कहा था कि ढांचे में रामलला विराजमान थे और ढांचा खंडहर हो चुका था। वह कभी भी गिरकर रामलला को क्षति पहुंचा सकता थ, इसलिये खंडहर को तोड़वाया, जिसमें देश के लाखों लोग थे। सभी राम भक्तों के मन में मंदिर निर्माण करने की इच्छा थी जिसकी पूर्ति लोगों ने किया उस स्थान पर कोई मस्जिद थी ही नहीं क्योंकि सन 1968 में जब से मै आया हूँ उस स्थान पर किसी को नवाज पढ़ते नहीं देखा।

 

बताते चलें कि बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत कर रही है। इस केस में अभियोजन पक्ष सीबीआई आरोपियों के खिलाफ 351 गवाह और तकरीबन 600 दस्तावेज पेश कर चुकी है। इस मामले में डाॅ. राम विलास वेदांती भी आरोपी हैं। उनके अलावा पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, साक्षी महाराज, साध्वी रितंभरा, विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय सहित कुल 32 आरोपी हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, गवाही और जिरह सुनने के बाद बीते एक सितंबर 2020 को मामले की सुनवाई पूरी कर ली। दो सितंबर से फैसला लिखना भी शुरू कर दिया गया। कोर्ट 30 सितंबर को इस केस का फैसला सुनाएगी। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस का मुकदमा 31 अगस्त तक पूरा करने का आदेश दिया था। हालांकि किन्हीं कारणों से इसमें एक माह की देर हुई। अब सभी पक्षों को फैसले का इंतजार है।



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