डाॅ. कफील खान को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएसए हटाया, दिये रिहाई के आदेश

प्रयागराज. बीआरडी मेडिकल काॅलेज में ऑक्सीजन कांड के बाद चर्चा में आए डाॅ. कफील खान के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डाॅ. कफील खान को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ लगाया गया एनएसए हटा दिया है। कोर्ट ने उनकी जल्द से जल्द रिहाई का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डाॅ. कफील खान को तुरंत रिहा करने के आदेश दिये हैं। बताते चलें कि डाॅ. कफील खान को नागरकिता संशोधन कानून सीएए को लेकर प्रदशर्न में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह फिलहाल मथुरा जेल में बंद हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में कफील खान की मां नुजहत परवीन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दाखिल की थी, जिसपर सुनवाई क बाद जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एसडी सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।


डॉ. कफील खान को अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन कानून यानि सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 13 फरवरी 2020 को एडवाइजरी बोर्ड और अलीगढ़ के जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर छह महीने के लिये एनएसए लगाकर जेल में डाल दिया गया थ।


तीन बार बढ़ाई गई एनएसए की अवधि

डाॅ. कफील खान को जेल में डालने के बाद सरकार ने उन पर एनएसए लगा दिया। इसके बाद उनके खिलाफ बीते अगस्त महीने में ही तीसरी बार एनएसए की अवधि एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिश पर बढ़ा दिया गया। इस मामले में एडवाइजरी बोर्ड का तर्क था कि कफील खान को एनएसए के तहत जेल में रखने के लिये पर्याप्त कारण मौजूद हैं।


सीएए एनआरसी के आंदोलनों में हुए थे शामिल

डॉ. कफील खान सीएए एनआरसी के खिलाफ हुए देशव्यापी आंदोलनों का हिस्सा बने थे। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान मंच भी साझा किया था। इसी दौरान अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा दिये गए भाषणों को भड़काऊ मानते हुए उन्हें 29 जनवरी को यूपी एटीएस द्वारा मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया और अलीगढ़ के डीएम की रिपोर्ट पर उनके खिलाफ एनएसए लगा दिया गया। अलीगढ़ सीजेएम कोर्ट ने डॉ. कफील खान को जमानत दे दी थी, लेकिन उनकी रिहाई के ठीक पहले उन पर एनएसए लगा दिया गया।


गोरखपुर ऑक्सीजन कांड से आए चर्चा में

डॉ. कफील खान साल 2017 में गोरखपुर के राजकीय बाबा राघव दास मेडिकल काॅलेज में दो दिनों के अंदर 30 से अधिक बच्चों की मौत के बाद चर्च में आए थे। घटना के वक्त कफील खान एईएस वार्ड के नोडल अधिकारी थे और उन्हें ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में आरोपी के तौर पर गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बर्खास्त भी किया गया था, और उस मामले में उन्हें महीनों जेल में भी रहना पड़ा था। इस मामले में उन्हें अप्रैल 2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।


मां ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

डाॅ. कफील खान के डिटेंशन को उनकी मां नुजहत परवीन की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने सरकारी अधिकारियों को अपना पक्ष रखने को कहा। याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट से 15 दिनों के अंदर याचिका पर फैसला करने को कहा।

 

कांग्रेस ने चलाया अभियान

जेल में बंद डाॅ. कफील खान की रिहाई को लेकर कांग्रेस ने भी अभियान चलाया। कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने योगी सरकार को उनकी रिहाई के लिये पत्र भी लिखा। इसके अलावा कांग्रेस ने उनकी रिहाई के लिये अभियान भी चलाया रखा है।



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