विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस आज, जीवन है अनमोल, इसको न समझें कोई खेल

बाराबंकी. जीवन में जल्द से जल्द सब कुछ हासिल कर लेने की तमन्ना और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में आज लोग बेवजह मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इसमें जरा सी नाकामयाबी अखरने लगती है और लोग अपनी जिन्दगी तक को दांव पर लगा देते हैं। कोरोना काल में भी लाक डाउन के चलते तमाम लोगों की नौकरियां चलीं गयीं, लोगों को अपनी रोजी- रोजगार छोड़कर वापस गाँव लौटना पड़ा। लोग शुरू में इसे लेकर तनाव में थे लेकिन अपनों के बीच बैठकर जब समस्या रखी तो उसका कोई न कोई रास्ता जरूर निकला। इसलिए जब भी हताशा-निराशा में कोई भी गलत कदम उठाने की बात दिमाग में आये तो सबसे पहले अपनों के करीब जाएँ। इन्हीं मामलों को देखते हुए हर साल 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इसे रोकने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना है। इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम है- “आत्महत्या रोकने को मिलकर काम करना ”।

जनपद में आत्महत्या के मामले

मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक डॉ. सौरभ ने बताया कि बाराबंकी में पिछले साल के मुकाबले आत्महत्या के मामले कम हुए। मार्च 2020 से अब तक 38902 कोविड19 के मामले आये। इसमें से 58 लोगों में घबराहट, उलझन , बेचैनी और मायूसी जैसे मानसिक रोगी वाले लक्षण पाये गये थे। मौके पर इन सभी का नियमित इलाज हुआ, जोकि अब ठीक है। उन्होंने बताया कोरोना महामारी के कारण जनपद में अभी तक आत्महत्या का एक भी मामला सामने नही आया है। आत्महत्या के मामले जागरूक करके ही कम किए जा सकते हैं।

जनपद में कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा सतीश चंद्रा का बताते है आत्महत्या को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका परिवार की होती है। उन्हें चाहिए कि वह अपने घर के सदस्य के व्यवहार में हो रहे परिवर्तन को देखें कि वह किस तरह बात कर रहा है, उसकी दिनचर्या या खानपान में कोई बदलाव तो नहीं आया। आज के समय में मनुष्य की जीवनशैली बदल गयी, जिसका एक प्रभाव उसके शरीर के साथ दिमाग पर भी पड़ रहा है।

इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन के अनुसार विश्व में आठ लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं , यानि हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति की मृत्यु आत्महत्या से होती है। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर 2.4 प्रति लाख जनसंख्या है मतलब यह है कि एक लाख की आबादी पर लगभग दो लोग आत्महत्या करते हैं वहीं राष्ट्रीय दर 10.4 प्रति लाख जनसंख्या है।

राज्य के मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डा. सुनील पाण्डेय ने बताया, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है अथवा आत्महत्या करने की सोच रहा है तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। मानसिक अस्वस्थता के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है, उचित परामर्श और चिकित्सा पद्धति के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है। आज कोरोना के दौर में आत्महत्या की जो ख़बरें मीडिया में आई हैं वह इस बात की और इशारा करती हैं कि लोगों में इस बीमारी के प्रति डर बहुत अधिक है तथा बहुत से लोग आर्थिक असुरक्षा से ग्रसित हैं। इसमें मीडिया का अहम रोल है। समस्या है तो समाधान भी है।

डा. पाण्डेय का कहना है कि आत्महत्या प्रवृत्ति वालों की पहचान आसानी से नहीं कर सकते, लेकिन कुछ असमान्य लक्षण से पीड़ितों की मनोस्थिति के बारे में जाना जा सकता है। इसमें जैसे उन्हें ठीक से नींद नहीं आती, उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है, वे अपने मनोभावों को व्यक्त करने में भ्रमित रहते हैं, उनकी खानपान की आदतों में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. या तो वे बहुत कम खाते हैं या बहुत ज़्यादा। आमतौर वे अपने फ़िज़िकल अपियरेंस को लेकर उदासीन हो जाते हैं, उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वे कैसे दिख रहे हैं, धीरे-धीरे वे लोगों से कटने लगते हैं। कई बार वह खुद को नुक़सान भी पहुंचाते हैं। इस स्थिति में परिवार का योगदान महत्वपूर्ण हो जाता है, वे वस्तुस्थिति को समझकर उनका ख्याल रखें एवं जरूरत पड़ने पर उनका उपचार कराएं।

क्या करें यदि मन में ऐसे विचार आते हों?

डा पाण्डेय के अनुसार- जीवनशैली में बदलाव लाएं, ख़ुद पर ध्यान देना शुरू करें, खानपान को संतुलित करें, नियमित रूप से कुछ समय व्यायाम या योग करते हुए बिताएं। नकारात्मक सोच को बाहर का रास्ता दिखाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात अकेले न रहें, परिवार और दोस्तों के संग रहें, सकारात्मक होकर कार्य करे। याद रखें, हर एक ज़िंदगी महत्वपूर्ण है इसे भरपूर जियें और तनाव से दूर रहें।

सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नम्बर 1075 पर पर भी इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। निमहंस (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस) के टोल फ्री नंबर- 080-46110007 पर कॉल कर परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा 7 सितम्बर को मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित समस्याओं के समाधान हेतु परामर्श के लिए सरकार ने किरन हेल्पलाइन नंबर- 1800-500-0019 जारी किया है।



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