स्कूलों को लेकर आया ये फैसला, एक लाख से ज्यादा छात्रों को बांटे जाएंगे नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक और यूनिफॉर्म

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में स्कूलों की कायापलट होगी। प्रदेश के 1194 जर्जर स्कूलों का निर्माण होगा। 688 विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण होगा। साथ ही 975 प्राथमिक और 219 उच्च प्राथमिक जर्जर विद्यालयों के भवनों का पुन: निर्माण किया जाएगा। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई सर्व शिक्षा अभियान कार्य परिषद की 54वीं बैठक में राज्य में प्रारंभिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए वर्ष 2020-21 में 9007.88 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शुक्रवार को अनुमोदित किया गया है। प्रारंभिक शिक्षा के लिए 8609.82 करोड़, शिक्षक प्रशिक्षण के लिए 109.52 करोड़ और माध्यमिक शिक्षा के लिए 288.73 करोड़ रुपये का बजट है।

कक्षा 1-8 के छात्रों को निशुल्क पाठ्यक्रम

परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुछ बदलाव किए जाएंगे। 26,729 स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर, 1160 विद्यालयों में पीने के पानी के लिए सबर्सिबल पंप, 668 विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, 219 उच्च प्राथमिक जर्जर विद्यालयों के भवनों का पुन: निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा कक्षा 1 से 8 तक के 179.32 लाख छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक और यूनिफॉर्म बांटे जाएंगे।

21 से शोध छात्रों को लैब आने की अनुमति

देश में विभिन्न स्थानों पप 21 से स्कूल खोले जाने की चर्चा है। हालांकि, यूपी में फिलहाल स्कूल नहीं खुलेंगे। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को खोलने पर जोर नहीं दिया जा रहा है। 21 सितंबर से केवल उन छात्रों को आनोे की अनुमति होगी जिन्हें लैब में शोध करना है। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में पढ़ाई नहीं होगी। वहीं माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों की भी कक्षाएं 30 सितंबर तक शुरू नहीं की जाएंगी।

केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार खोले जाएंगे स्कूल

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि सूबे में स्कूल केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गृह मंत्रालय से जैसे ही कोई गाइडलाइन आएगी, उसका पालन किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में स्कूलों द्वारा अभिभावकों से फीस को लेकर उठे मुद्दे पर प्रदेश सरकार अपना नजरिया स्पष्ट कर चुकी है। विद्यालय प्रबंधन किसी भी अभिभावक पर तीन माह की फीस एक साथ जमा करने के लिए दबाव नहीं बनाएंगे।

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