जानिए बाबरी विवाद का पूरा मामला जिस पर सीबीआइ कोर्ट कल आडवाणी, जोशी के ख़िलाफ़ सुनाएगी फ़ैसला

अयोध्या : बाबरी विध्वंस मामले में 30 सितंबर को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट आरोपियों को लेकर अपना फैसला सुनाने जा रही है। लेकिन जिस विवाद को लेकर यह मामला सीबीआई की अदालत तक पहुंचा है वह मामला 9 नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के स्पेशल बेंच ने समाप्त करते हुए राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया है।

6 दिसंबर 1992 में चंद मिनटों में गिरा दिया गया ढांचा

6 दिसंबर 1992 में राम जन्मभूमि परिसर में स्थित विवादित ढांचे को लाखों कारसेवकों ने चंद मिनटों में ही ढहा दिया था उस समय राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था मंदिर निर्माण की इच्छा लिए लाखों कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे जहां कारसेवा का ऐलान होने के बाद कार्य सेवकों ने परिसर पर चढ़ाई कर दिया और देखते-देखते ढांचे को ध्वस्त कर दिया जिसके बाद इस मामले को लेकर मुस्लिम पक्षकारों ने कोर्ट में ढांचा गिराए जाने को लेकर याचिका दाखिल की और इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले 49 लोगों को आरोपी बनाया गया लंबे समय तब चली सुनवाई के दौरान 17 आरोपी का निधन भी हो चुका है । और अब यह मामला को सीबीआई की अदालत में पहुंचा गया है जहां वर्तमान में 32 लोगों को आरोपी मानते हुए अंतिम सुनवाई के बाद 30 सितंबर को फैसला सुनाने जा रही है।

अपराधिक साजिश रचने का था आरोप

6 दिसंबर 1992 को हुई घटना के बाद 49 लोगों को आरोपी बताया इस मामले पर सीबीआई के द्वारा जांच कर 5 अक्टूबर 1993 में सभी लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। और सीबीआई की अदालत में सभी के खिलाफ केस शुरू हुआ आठ आरोपियों को लेकर रायबरेली की कोर्ट में सुनवाई की आने लगी बाद में अप्रैल 2017 मे या मामला बीच सीबीआई के लखनऊ की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। और 49 लोगो के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 (1)बी के साथ ही धारा 120 बी यानि आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए मुकदमा चला जिसमे अभी तक 17 लोगो का निधन हो चुका है। और 32 आरोपियों पर 30 सितंबर को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रही है।



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