'भगवान राम' पर बोले लोटन राम निषाद, नाराज अखिलेश यादव ने दी सख्त सजा

लखनऊ. लोटन राम निषाद अचानक यूपी की राजनीति की चर्चाओं का केंद्र बिन्दु बन गए। इस वक्त उत्तर प्रदेश का हर व्यक्ति यह जानना चाहता है कि लोटन राम निषाद आखिर हैं कौन। लोटन राम निषाद समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे थे। भगवान राम पर की गई एक टिप्पणी की वजह से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए उन्हें उनके पद से हटाकर विधान परिषद सदस्य राजपाल कश्यप को समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का नया अध्यक्ष बना गया। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने आदेश जारी कर नए अध्यक्ष राजपाल कश्यप को यह निर्देश दिया कि, वे 15 दिन में नई कार्यकारिणी का गठन कर लें। अब जानते हैं कि लोटन राम निषाद ने ऐसा क्या कह दिया था कि जिस वजह से उनको अपना अहम पद गवांना पड़ा। निषाद को मार्च 2020 में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बनाया गया था। हिंदू योद्धा के नेता महेश मिश्रा ने अयोध्या कोतवाली नगर में मुकदमा भी दर्ज कराया है।

इस वजह से गया पद :- हुआ यह कि बीते 21 अगस्त को अयोध्या में कुछ पत्रकारों ने लोटन राम निषाद से राम मंदिर के बारे में सवाल पूछ लिया, जिसके जवाब में उन्होंने कह दिया कि, राम थे कि नहीं, राम के अस्तित्व पर भी मैं प्रश्न खड़ा करता हूं। राम एक काल्पनिक पात्र हैं। जैसे फिल्मों की स्टोरी बनाई जाती है, वैसे ही राम एक स्टोरी के एक पात्र हैं। राम का कोई अस्तित्व नहीं है। संविधान भी कह चुका है कि राम कोई थे ही नहीं।’

'भगवान राम' पर बोले लोटन राम निषाद, नाराज अखिलेश यादव ने दी सख्त सजा

राम के प्रति मेरी आस्था नहीं :- लोटन राम निषाद ने यह भी कहा, ‘अयोध्या में राम का मंदिर बने चाहे कृष्ण का मंदिर, मुझे मंदिर से कोई लेना देना नहीं है, राम के प्रति मेरी आस्था नहीं है। मेरी आस्था बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संविधान में है। कर्पूरी ठाकुर में और छत्रपति शाहू जी महाराज में है, जिनसे हमें बोलने का, नौकरी में जाने का, पढ़ने-लिखने का और कुर्सी पर बैठने का अधिकार मिला।’ उन्होंने कहा, 'हमें यह सभी अधिकार ज्योतिबा फूले, सावित्री बाई फूले से मिले हैं, जिनसे मुझे डायरेक्ट लाभ मिला है, मैं उनको जानता हूं।'

टीका-टिप्पणी न की जाए :- बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी में मौखिकतौर पर पार्टी पदाधिकारियों को बताया जा चुका है कि किसी भी देवी, देवता व महापुरुषों के बारे में कोई भी टीका-टिप्पणी न की जाए।



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