ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दिया स्मार्ट फोन, बच्चे ने खेला ऐसा गेम कि पिता के खाते से उड़ गए लाखों रुपए

आगरा. कोरोना काल में बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए ऑनलाइन क्लासेज का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके विपरीत परिणाम देखने को मिल रहे हैंं। ताजा मामला आगरा का है, जहां परिवहन विभाग के एक अधिकारी को अपने बेटे को ऑनलाइन क्लास के लिए स्मार्ट फोन देना महंगा पड़ गया है। उनके बेटे ने ऑनलाइन क्लास के स्थान पर छह महीने तक ऑनलाइन गेम खेलकर 2.50 लाख रुपए उड़ा दिए हैं। अधिकारी ने जब बैंक खाते की जानकारी ली तो पता चला कि वह तो खाली हो गया है, उसमें केवल 500 रुपए शेष हैं। उन्होंने साइबर क्राइम की आशंका जताते हुए पुलिस से शिकायत की। जब उन्हें हकीकत पता चली तो उनके होश उड़ गए।

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दरअसल, सिकंदरा के रहने वाले परिवहन अधिकारी ने 22 सितंबर को पुलिस की साइबर सेल में अपने बैंक खाते से ढाई लाख रुपए निकलने की शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही कहा कि जिस खाते से राशि निकाली गई है वह उस खाते से कम ही लेन-देन करते हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन राशि ट्रांसफर करने के लिए खाते का बैलेंस चेक किया तो ढाई लाख गायब थे। खाते में केवल 500 रुपए ही शेष थे। उन्होंने साइबर क्राइम की आशंका व्यक्त की थी। साइबर सेल की जांच में पता चला कि खाते से राशि पेटीएम से ऑनलाइन ट्रांसफर की गई है और राशि को मार्च से अगस्त के बीच कई बार में गेम कंपनियों पेटीएम के माध्यम से भुगतान किया गया है।

इसके बाद पुलिस ने परिवहन अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि उनका दस वर्षीय बेटा कक्षा छह में पढ़ता है। उन्होंने उसे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अपना मोबाइल दिया था, लेकिन वह मोबाइल पर ऑनलाइन गेम भी खेलता था। इस दौरान बच्चे ने गेम में रिवार्ड प्वाइंट, क्वाइन, विशेष हथियार का विकल्प लेने के लिए भुगतान किया था। जब अधिकारी को अपने बेटे की नादानी के बारे में पता चला तो उन्होंने शिकायत वापस ले ली और बेटे को समझाया। परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि मोबाइल से उनका पेटीएम से खाता भी जुड़ा था। वह पेटीएम का वन टाइम पासवर्ड देखते ही उसे हटा देता था।

बच्चों का रखें ध्यान

इस संबंध में साइबर सेल एक्सपर्ट का कहना है कि जिस मोबाइल का इस्तेमाल बच्चे पढ़ाई आदि के लिए करते हैं। उसमें पेटीएम या अन्य कोई ऐसा ऐप नहीं रखें। हो सके तो उस मोबाइल नंबर से किसी भी बैंक खाते को भी लिंक न रखें। वहीं, बच्चे अगर गेम खेल रहे हैं तो उनसे पता कर लें कि वह रुपए देकर गेम डाउनलोड कर रहे हैं या निशुल्क। समय-समय पर बच्चों को दिए गए मोबाइल की जांच करते रहें।

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