RJD छोड़ने के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने फिर लिखी भावुक चिट्ठी, बिना नाम लिए लालू को खूब सुनाया

सिर्फ दो लाइन की चिट्ठी लिख कर बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले RJD से इस्तीफ़ा दे चुके रघुवंश प्रसाद सिंह ने आज फिर एक भावुक चिट्ठी लिखी. इस चिट्ठी में उन्होंने बताया कि RJD किस तरह से सिर्फ एक परिवार की पार्टी हो कर रह गई. बिना नाम लिए उन्होंने पार्टी में परिवारवाद पर निशाना साधा. हाथ से लिखी उनकी ये चिट्ठी खूब वायरल हो रही है. इस वक़्त रघुवंश प्रसाद सिंह का दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा है.

रघुवंश प्रसाद ने अपनी चिट्ठी में लिखा, ‘राजनीति मतलब बुराई से लड़ना, धर्म मतलब अच्छाई करना. वर्तमान में राजनीति में इतनी गिरावट आ गई है, जिससे लोकतंत्र पर खतरा है. कुछ पार्टियों के द्वारा सीटों के लिए टिकट की खरीद-विक्री होती है. इससे लोकतंत्र पर ही खतरा है क्योंकि लोकतंत्र मतलब वोट का राज और वोट प्रणाली ही चौपट हो जाए तो लोकतंत्र कैसे बचेगा.’

उन्होंने परिवारवाद पर तंज कसते हुए कहा कि अब पार्टी के पोस्ट परे सिर्फ परिवार के 5 सदस्य नज़र आते हैं. महापुरुष गायब हो गए. उन्होंने चिट्ठी में लिखा, ‘महात्मा गांधी, बाबू जयप्रकाश, डॉ. लोहिया, बाबा साहेब और जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम और विचारधारा पर लाखों लोग लगे रहे, कठिनाईयां सहीं, लेकिन डगमग नहीं हुए, लेकिन अब समाजवाद की जगह सामंतवाद, जातिवाद, वंशवाद, परिवारवाद, संप्रदायवाद आ गया। यह सभी उतनी ही बुराईयां हैं, जिसके खिलाफ समाजवाद का जन्म हुआ था.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘अब इन पांचों महान पुरुष की जगह एक ही परिवार के पांच लोगों की फोटो छपने लगी है. पद हो जाने से धन कमाना और धन कमाकर ज्यादा लाभ का पद खोजना, राजनीति की परिभाषा के अनुसार इन सभी बुराइयों से लड़ना है. आरजेडी संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से ही पार्टी में संगठन और संघर्ष को मजबूत करने के लिए लिखा, लेकिन पढ़ने तक का कष्ट नहीं किया गया.’



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