युएई में भारतीय इंजीनियर हुआ ईशनिंदा का शिकार, 15 साल की सजा और 1 करोड़ रुपये जुर्माना

गोरखपुर. युनाइटेड अरब अमीरात (United Arab Emarat) यानि यूएई में गोरखपुर के एक इंजीनियर को ईशनिंदा की सजा सुनाई गई है। इंजीनियर को ईशनिंदा के आरोप में 15 साल की जेल और एक करोड़ रुपये का भारी भरकम जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं जुर्माना न अदा करने पर भारतीय इंजीनियर को अपनी पूरी जिंदगी यूएई की जेल में ही गुजारनी होगी। हालांकि परिवार का दावा है कि अखिलेश बेकसूर हैं और उन्हें उनके अधीन काम करने वालों ने फंसाया है। इस खबर के बाद इंजीनियर का परिवार सदमे में है और उसने भारत सरकार से उन्हें छुड़ाकर वतन वापस लाने की मांग की है। परिवार की गुहार पर भारत सरकार की ओर से यूएई सरकार को इंजीनियर पर दया दिखाते हुए उसे इंडिया वापस भेजने की अपील की गई है, लेकिन अभी तक ऐसा होने की कोई सूरत नहीं दिख रही है।

 

गोरखपुर के शाहपुर के बशारतपुर निवासी अखिलेश पाण्डेय की पत्नी अंकिता पाण्डेय पति पर संकट आने के बाद उनकी रिहाई के लिये संघर्ष कर रही हैं। अखिलेश को गिरफ्तार किये जाने के बाद परिवार की ओर से दया याचिका दाखिल करने के साथ ही यूएई के सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की है। भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री से पति को छुड़ाकर वापस वतन वापसी के लिये गुहार लगाई। इसके अलावा गोरखपुर के सांसद रवि किशन, कमलेश पासवान और देवरिया के सांसद रमापति राम त्रिपाठी के साथ ही राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ल ने भी अंकिता की गुहार पर उनके पति की मदद के लिये विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा। साथ ही अंकिता ने अखिलेश की सजा माफ करने की अपील की थी।


सरकार ने अंकिता की गुहार सुनी और केन्द्र सरकार की ओर से यूएई सरकार को दया याचिका भेजकर इंजीनियर अखिलेश की वतन वापसी की मांग की है। विदेश मंत्रालय की ओर से परिवार को यह जानकारी दी गई है, लेकिन अभी तक अखिलेश के जेल से छूटकर वतन वापसी की कोई किरन नहीं दिखने से परिवार परेशान है।

 

गुलिरहां क्षेत्र के स्कूल शिक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के तीन बेटों में सबसे बड़े अखिलेश पाण्डेय पिछले 10 वर्ष से यूएई की यूनियन सीमेंट कंपनी 'रास अल खेमा’ में सीनियर सेफ्टी इंजीनियर की पोस्ट पर कार्यरत थे। कुछ ही समय बाद पत्नी अंकिता भी वहीं चली गयीं। अखिलेश की एक ढाई साल की बेटी अविका भी है। जब अखिलेश को गिरफ्तार किया गया था तो उसके बाद पत्नी और बेटी यूएई में अकेले पड़ गए थे। घरवालों ने किसी तरह इंजताम करके दोनों को पापस बुलाया।

 

क्या है पूरा मामला

पेशे से इंजीनियर अखिलेश पाण्डेय पिछले 10 साल से युएई की यूनियन सीमेंट कंपनी 'रास अल खेमा’ में सीनियर सेफ्टी इंजीनियर की पोस्ट पर थे। परिजनों का आरोप है कि उनके अंडर में काम करने वाले सुडानी, पाकिस्तानी और दो भारतीय मजदूरों ने अखिलेश के खिलाफ ईशनिंदा का आरोप लगाकर पुलिस से शिकायत कर दी। जिसके बाद अक्टूबर 2019 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि परिवार की मानें तो पुलिस को तफ्तीश में आरोप साबित करने वाला न तो कोई वीडियो क्लिप मिला न ही कोई ऑडियो रिकाॅर्डिंग या कोई और सबूत। पर यूएई के एक कानून के तहत अखिलेश फंस गए हैं। यूएई के कानून के मुताबिक अगर तीन या तीन से ज्यादा लोग कुरान की कसम खाकर गवाही दे दें तो आरोप को सही माना जा सकता है। आबूधाबी की कोर्ट ने इसी आधाार पर अखिलेश को 22 फरवरी 2020 को सजा सुना दी। पुलिस ने गवाहों के आधार पर चार्जशीट में अखिलेश पर यूएई के मुस्लमि नागरिकों को भद्दी-भद्दी गालियां देने और वहां के सुल्तान को आपत्तिजनक शब्द कहने का आरोप लगाया।

 

परिवार का आरोप कर्मचारियों ने फंसाया अखिलेश को

इंजीनियर अखिलेश पाण्डेय के परिवार की मानें तो उन्हें उनके ही अधीनस्थ कर्मचारियों ने साजिश कर फंसा दिया, क्योंकि अखिलेश ने सत्यापन के दौरान मेडिकल लीव के पेपर्स में गड़बड़ी पकड़ने के बाद उसे अपने उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिया था।पत्नी अंकिता पाण्डेय के मुताबिक इसके बाद सुडानी नागरिक अब्दुल मनीम अल जैक, पाकिस्तानी सिटिजन नागरिक राणा मजीद व दो भारतीय मु. हुसैन खान मोहा राजस्थान और हैदराबाद के मोहम्मदुल्लाह शेख के साथ अखिलेश के केबिन में जाकर उनसे विवाद किया और बाहर निकलकर शोर मचाते हुए आरोप लगा दिया कि अखिलेश ने मुस्लिम समुदाय और यूएई के सुल्तान पर अपमानजनक टिप्पणी की है, जिसके बाद अखिलेश को गिरफ्तार कर लिया गया।



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