हाथरस मामला: 19 पर एफआईआर, 6 गिरफ्तार, एडीजी का बयान- पीड़ित परिवार को दिया गया 50 लाख का लालच

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की दलित युवती से गैंगरेप (Hathras Gangrape) और फिर हत्या के मामले में यूपी सरकार लगातार आलोचना का सामना कर रही है। विपक्ष लगातार योगी सरकार पर हमलावर हो रहा है। जल्दबाजी में देर रात पीड़िता के परिवार की मर्जी के खिलाफ उसका अंतिम संस्कार करना और फिर मीडिया व विपक्षी नेताओं की एंट्री पर बैन लगाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में हाथरस पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग में प्रद्रशन किया गया। इस बीच पुलिस और विपक्ष के बीच पथराव भी हुआ। उधर, प्रदेश का माहौल बिगाड़ने के आरोप में प्रदेश के आठ शहरों में 19 एफआईआर दर्ज कर ठह लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके साथ ही पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने के एवज में 50 लाख रुपये की पेशकश किए जाने की बात भी सामने आई है। एक पत्रकार और एक नेता के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है।

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पीड़ित परिवार पर दबाव

एडीजी प्रशांत कुमार (ADG Prashant Kumar) ने बताया कि पीड़िता के परिवार पर गलत बयान देने का दबाव था और उन्हें 50 लाख रुपये देने का वादा भी किया गया था। इसके साथ ही पीड़िता के भाई से यह कहा गया था कि वह अपने पिता को मीडिया में बयान देने के लिए मनाए। साथ ही कहे कि वह सरकार की कार्रवाई से खुश नहीं हैं।

दंगे से प्रदेश में रुकेगा विकास

एडीजी ने कहा कि विपक्ष माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। इस दंगे की वजह से प्रदेश में विकास रुकेगा और विपक्ष को अपनी रोटियां सेंकने का मौका मिलेगा इसलिए वे नए-नए षडयंत्र करते रहते हैं।

माहौल बिगाड़ने की कोशिश

एडीजी ने कहा कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आम लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। हमने इसमें से कुछ की पहचान कर केस दर्ज कर लिया है।एडीजी ने कहा कि पोस्टरों, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। मथुरा, बुलंदशहर, शामली, सहारनपुर, लखनऊ, प्रयागराज, बिजनौर और बुलंदशहर में केस दर्ज किए गए हैं।

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एमएलसी रिपोर्ट में दुष्कर्म के संकेत

हाथरस की घटना के संबंध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को अप्रासंगिक बताया है। उन्होंने मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) में योनि में पेनीट्रेशन होने की बात दर्ज है। बता दें कि एफएसएल रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि पीड़िता का दुष्कर्म नहीं किया गया था। जबकि इससे पहले उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने हाथरस मामले में कहा था कि 19 वर्षीय युवती ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में गर्दन की चोट के कारण दम तोड़ दिया, उसका बलात्कार नहीं हुआ था क्योंकि उसकी फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट में एकत्र नमूनों में शुक्राणु का संकेत नहीं था।

अलीगढ़ के सीएमओ डॉ. अज़ीम मलिक ने कहा है कि पीड़िता के साथ कथित तौर पर बलात्कार के 11 दिन बाद नमूने एकत्र किए गए थे, जबकि सरकारी दिशा निर्देशों में सख्ती से कहा गया है कि घटना के 96 घंटे बाद तक केवल फॉरेंसिक सबूत ही मिल सकते हैं। यह रिपोर्ट इस घटना में बलात्कार की पुष्टि नहीं कर सकती है। इसलिए एस रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है। जबकि इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रदेश सरकार और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दुष्कर्म न होने की बात कर रहे हैं। उधर, एएमयू की रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हमजा मलिक का कहना है कि गाइडलाइन के हिसाब से जब एफएसएल की रिपोर्ट अप्रासंगिक है तो एमएलसी के परीक्षण की बात और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए संकेत को एक साथ जोड़कर निष्कर्ष निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई है, उसमें साफ है कि पीड़िता का हाइमन क्षतिग्रस्त होने के बाद घाव ठीक हो जाना पाया गया है। हाथरस की घटना 14 सितंबर को घटित हुई थी जबकि शव का पोस्टमार्टम 29 सितंबर को किया गया। डॉ. हमजा ने कहा कि हाइमन का घाव ठीक होने के लिए आठ से 10 दिन काफी होते हैं। उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पीड़िता की मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलसी) को एक साथ जोड़कर देखें, तो दुष्कर्म की पुष्टि हो सकती है।

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